हरिद्वार9 घंटे पहले
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जब हम किसी से बात करते हैं, तो हमारे शब्दों में प्रेम और मिठास होनी चाहिए। हमारी बोली हमारे बारे में बहुत कुछ बता देती है। हम जैसा बोलते हैं, वैसा ही हमारा स्वभाव, सोच और संस्कार दिखाई देते हैं। हमारी भाषा से हमारी वंश परंपरा और हमारे पूर्वजों की सीख झलकती है। हमारे शब्द केवल हमारे नहीं होते, वे हमारे परिवार और समाज की पहचान भी होते हैं। इसलिए बोलते समय हमेशा सोच-समझकर, अच्छे और मधुर शब्दों इस्तेमाल करना चाहिए।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए सफलता के सूत्र क्या हैं?
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