स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:  शब्दों से संस्कार, संस्कृति, वंश और परंपरा मालूम होती है, इसलिए हमारी बोली में प्रेम होना चाहिए
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स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र: शब्दों से संस्कार, संस्कृति, वंश और परंपरा मालूम होती है, इसलिए हमारी बोली में प्रेम होना चाहिए

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हरिद्वार12 घंटे पहले

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कोई शब्द हमारे होठों पर आए, इससे पहले हमें सोच-विचार जरूर करना चाहिए। हमारी अभिव्यक्ति में माधुर्य, सत्यता, प्रेम होना चाहिए। अभिव्यक्ति में हमारे संस्कार, विचार, वंश, परंपरा के साथ ही संस्कृति झलकती है। हम किसी एक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए हम जो बोल रहे हैं, उसके बारे में सतर्क रहना चाहिए।

आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए बोलते समय किन बातों का ध्यान रखें?

आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें।

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