स्विगी-जोमैटो डिलीवरी बॉयज को भी मिलेगा बीमा:  रजिस्ट्रेशन के लिए 90 दिन काम करना जरूरी; सोशल सिक्योरिटी के ड्राफ्ट रूल्स जारी
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स्विगी-जोमैटो डिलीवरी बॉयज को भी मिलेगा बीमा: रजिस्ट्रेशन के लिए 90 दिन काम करना जरूरी; सोशल सिक्योरिटी के ड्राफ्ट रूल्स जारी

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नई दिल्ली28 मिनट पहले

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सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए बनाया गया था। - Dainik Bhaskar

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए बनाया गया था।

देशभर के लाखों डिलीवरी बॉयज, कैब ड्राइवर्स को अब हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और एक्सीडेंट कवर जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

केंद्र सरकार ने ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ के तहत नए ड्राफ्ट नियमों को नोटिफाई कर दिया है। एक साल में कम से कम 90 दिन काम करने पर वर्कर्स को फायदा मिलेगा।

फिलहाल सरकार ने ड्राफ्ट रूल्स पर फीडबैक मांगा है, जिसके बाद इसे फाइनल कर लागू कर दिया जाएगा। हाल ही में हुई हड़ताल के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है।

इससे पहले जोमैटो-स्विगी जैसी कंपनियों ने भी न्यू ईयर जैसे मौकों पर पीक आवर्स में हर ऑर्डर पर ₹120-150 देने का वादा किया था।

रजिस्ट्रेशन कैसे होगा, वर्कर्स के लिए आधार जरूरी

अगर आप किसी भी फूड या राइड-शेयरिंग एप के साथ काम करते हैं, तो सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कंपनियां इसमें गिग वर्कर्स की मदद करेंगी।

  • आधार कार्ड: रजिस्ट्रेशन के लिए आधार नंबर जरूरी है। उम्र 16 साल से ज्यादा होनी चाहिए। ​​​​​​डेटा शेयर होते ही एक ‘यूनिवर्सल अकाउंट नंबर’ जनरेट होगा।
  • डिजिटल आईडी कार्ड: वर्कर्स को एक पहचान पत्र मिलेगा, जिसे पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा। इसमें वर्कर की फोटो और पूरी डिटेल्स होगी।
  • डिटेल्स अपडेट: अगर आपका मोबाइल नंबर, पता या स्किल बदलती है, तो आपको पोर्टल पर जानकारी देनी होगी, वरना फायदे रुक सकते हैं।

1 साल में 90 दिन काम करना जरूरी

हर गिग वर्कर इन फायदों का हकदार नहीं होगा। इसके लिए सरकार ने कुछ शर्तें रखी हैं:

  • वर्किंग डेज: एक साल में कम से कम 90 दिन एक ही कंपनी के साथ काम किया हो। एक साथ अलग-अलग एप्स पर काम करते हैं, तो 120 दिन का काम होना जरूरी है।
  • दिन की गणना: अगर आप एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए डिलीवरी करते हैं, तो उसे ‘तीन दिन’ गिना जाएगा।
  • उम्र सीमा: 60 साल की उम्र पूरी होने पर यह पात्रता खत्म हो जाएगी। साथ ही, अगर आप लगातार 90-120 दिन काम नहीं करते हैं, तो भी आप स्कीम से बाहर हो सकते हैं।

क्या-क्या फायदे मिलेंगे:अलग सोशल सिक्योरिटी फंड बनेगा

सरकार कंपनियों से कंट्रीब्यूशन लेकर एक विशेष ‘सोशल सिक्योरिटी फंड’ बनाएगी। इससे वर्कर्स को ये फायदे मिलेंगे:

  • इंश्योरेंस: लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा मिलेगी। काम के दौरान दुर्घटना होने पर पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस का फायदा मिलेगा।
  • पेंशन और नई स्कीम्स: नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में गिग वर्कर्स के 5 सदस्यों को शामिल किया जाएगा, जो नई योजनाओं पर सुझाव देंगे।

ड्राफ्ट रूल्स पर स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगे

ड्राफ्ट रूल्स पर स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगे गए हैं। नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में गिग वर्कर्स के 5 मेंबर्स नॉमिनेट किए जाएंगे, जो रोटेशन पर रहेंगे। बोर्ड वर्कर्स की संख्या का अनुमान लगाएगा और नई स्कीम्स सजेस्ट करेगा। फाइनल रूल्स आने के बाद ये लागू हो सकते हैं।

25 दिसंबर को डिलीवरी वर्कर्स ने सांकेतिक हड़ताल की थी।

25 दिसंबर को डिलीवरी वर्कर्स ने सांकेतिक हड़ताल की थी।

स्विगी-जोमैटो ने इंसेंटिव का ऐलान किया था

2 दिन पहले देशभर में गिग वर्कर्स यानी डिलीवरी पर्सन्स की हड़ताल के बीच स्विगी और जोमैटो ने पीक ऑवर्स और ईयर-एंड डेज पर ज्यादा इंसेंटिव देने का ऐलान किया था।

जोमैटो ने डिलीवरी पार्टनर्स को मैसेज भेजकर बताया कि पीक ऑवर्स (शाम 6 से रात 12 बजे) में हर ऑर्डर ₹120-150 पेआउट मिलेगा। स्विगी ने कहा की डिलीवरी वर्कर्स 31 दिसंबर और 1 जनवरी मिलाकर ₹10,000 तक कमा सकते हैं।

गिग वर्कर्स की हड़ताल की 5 वजह थीं

डिलीवरी पार्टनर्स और राइडर्स की हड़ताल के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही कई शिकायतें थीं। यूनियन नेताओं और एक्सपर्ट्स के मुताबिक मुख्य कारण ये हैं:

1. सोशल सिक्योरिटी और वेलफेयर फंड का अभाव

गिग वर्कर्स की सबसे बड़ी मांग सामाजिक सुरक्षा है। सरकारी नियमों के बावजूद, कई राज्यों में अभी तक इन वर्कर्स को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा या पीएफ (PF) जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

2. गिरती हुई कमाई और इंसेंटिव में कटौती

शुरुआत में कंपनियां डिलीवरी पार्टनर्स को ज्यादा इंसेंटिव देती थीं। उनमें अब कटौती की गई है। पहले प्रति ऑर्डर ₹40 से ₹60 मिलते थे। अब यह घटकर ₹15 से ₹25 के बीच रह गया है।

3. खराब वर्किंग कंडीशन और 10-मिनट डिलीवरी का दबाव

क्विक कॉमर्स एप्स जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो में 10-12 मिनट में डिलीवरी करने का दबाव रहता है। वर्कर्स का आरोप है कि इस चक्कर में उनके एक्सीडेंट होने का खतरा बढ़ गया है।

4. मनमाने तरीके से आईडी (ID) ब्लॉक करना

गिग वर्कर्स की एक बड़ी शिकायत यह है कि कंपनियां बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण के उनकी आईडी ब्लॉक कर देती हैं। इससे उनका रोजगार अचानक छिन जाता है।

5. गिग वर्कर का कानूनी दर्जा

फिलहाल इन वर्कर्स को कंपनियों का ‘पार्टनर’ कहा जाता है, ‘कर्मचारी’ नहीं। हड़ताल के जरिए ये मांग की जा रही है कि उन्हें औपचारिक कर्मचारी माना जाए।

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