हिंडनबर्ग केस में SEBI की पूर्व चीफ को क्लीनचिट:  लोकपाल ने कहा- माधबी बुच के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला
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हिंडनबर्ग केस में SEBI की पूर्व चीफ को क्लीनचिट: लोकपाल ने कहा- माधबी बुच के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला

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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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माधबी पुरी बुच 28 फरवरी को सेबी चीफ के पद से रिटायर हुई थीं। - Dainik Bhaskar

माधबी पुरी बुच 28 फरवरी को सेबी चीफ के पद से रिटायर हुई थीं।

SEBI की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को हिंडनबर्ग मामले में लोकपाल ने क्लिनचिट दे दी है। लोकपाल की एंटी करप्शन बॉडी ने हिंडनबर्ग केस में उनके खिलाफ सभी शिकायतों का निपटारा कर दिया है। लोकपाल ने कहा है कि बुच के खिलाफ जांच का आदेश देने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं हैं।

लोकपाल ने आदेश में कहा, ‘हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि शिकायतों में लगाए गए आरोप अनुमानों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इसके अलावा इस मामले में कोई भी वेरिफाइड मटेरियल नहीं मिला है। इसलिए उनके खिलाफ की गईं सभी शिकायतों को खारिज किया जाता है।’

लोकपाल ने कहा, ‘शिकायतकर्ताओं ने इस स्थिति के प्रति सचेत रहते हुए रिपोर्ट से स्वतंत्र होकर आरोपों को स्पष्ट करने का प्रयास किया। लेकिन हमारे द्वारा आरोपों के एनालिसिस से यह निष्कर्ष निकला कि वे सभी आरोप अपुष्ट, अप्रमाणित और तुच्छ हैं।’ इसके अलाव लोकपाल ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी आरोप में कोई दम नहीं है।

लोकपाल ने माधबी बुच के खिलाफ लगाए गए 5 मुख्य आरोपों की जांच की

  • माधबी बुच और उनके पति धवल बुच ने अडाणी ग्रुप में निवेश से जुड़े एक फंड में काफी बड़ी रकम निवेश की।
  • M&M और ब्लैकस्टोन इंक जैसी कंपनियों से कंसल्टेंसी सर्विसेज फीस की आड़ में लेन-देन किया।
  • किराए की इनकम की आड़ में वॉकहार्ट से लेन-देन किया।
  • 2017 से 2024 के बीच पांच साल की अवधि में ICICI बैंक के ESOP बेचकर अनुचित लाभ कमाया।
  • M&M और ब्लैकस्टोन इंक से जुडे़ मामलों से खुद को अलग करने का दिखावा किया।

मामले में शिकायतकर्ताओं ने कोई ठोस सबूत नहीं दिए

लोकपाल ने कहा, ‘शिकायतकर्ता बिना पुख्ता सबूतों के हल्के-फुल्के और कमजोर आरोप लगाकर सिर्फ मामले को बड़ा और राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। इससे लोकपाल की प्रक्रिया का महत्व कम हो गया है। ये शिकायतें परेशान करने वाली हैं, जिन पर कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

लोकपाल ने यह भी साफ किया कि शिकायतकर्ताओं ने कोई ठोस सबूत नहीं दिए। आदेश में कहा गया कि शिकायतकर्ता हमसे चाहते हैं कि हम ऐसे आरोपों की जांच करें, जो बेबुनियाद, अटकलों पर आधारित हैं।’

माधबी की उसी विदेशी फंड में हिस्सेदारी, जिसमें अडाणी का निवेश

अगस्त में अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की अडाणी ग्रुप से जुड़ी ऑफशोर कंपनी में हिस्सेदारी है। वहीं बुच ने इन आरोपों को “निराधार” और “चरित्र हनन” का प्रयास बताया था।

माधबी बुच ने कहा था- हमारी जिंदगी और फाइनेंसेस एक खुली किताब

तब SEBI चेयरपर्सन ने सभी फाइनेंशियल रिकॉर्ड डिक्लेयर करने की इच्छा व्यक्त की थी। अपने पति धवल बुच के साथ एक जॉइंट स्टेटमेंट में उन्होंने कहा था कि हमारा जीवन और फाइनेंसेस एक खुली किताब है।

इससे पहले अडाणी ग्रुप पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाकर हिंडनबर्ग रिसर्च चर्चा में आई थी। व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों के आधार पर हिंडनबर्ग ने दावा किया था कि बुच और उनके पति की मॉरीशस की ऑफशोर कंपनी ‘ग्लोबल डायनामिक अपॉर्च्युनिटी फंड’ में हिस्सेदारी है।

हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया है कि ‘ग्लोबल डायनामिक अपॉर्च्युनिटी फंड’ में कथित तौर पर अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी ने अरबों डॉलर निवेश किए हैं। इस पैसे का इस्तेमाल अडाणी ग्रुप के शेयरों के दामों में तेजी लाने के लिए किया गया था।

अडाणी ग्रुप ने कहा था- हिंडनबर्ग ने अपने फायदे के लिए ऐसा किया

हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट का अडाणी ग्रुप ने भी खंडन किया था। ग्रुप ने कहा था- हिंडनबर्ग ने अपने फायदे के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का गलत इस्तेमाल किया। अडाणी ग्रुप पर लगाए आरोप पहले ही निराधार साबित हो चुके हैं। गहन जांच के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2024 में हिंडनबर्ग के आरोपों को खारिज कर दिया था।

कायर्काल के दौरान माधबी बुच पर लगे बड़े आरोप

  • अमेरिकी कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने शनिवार (19 अगस्त) की रात 9:57 बजे एक रिपोर्ट जारी की। इसमें दावा किया गया था कि SEBI चीफ माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की अडाणी ग्रुप से जुड़ी ऑफशोर कंपनी में हिस्सेदारी है। व्हिसलब्लोअर दस्तावेजों के आधार पर हिंडनबर्ग ने दावा किया कि बुच और उनके पति की मॉरीशस की ऑफशोर कंपनी ‘ग्लोबल डायनामिक अपॉर्च्युनिटी फंड’ में हिस्सेदारी है।
  • हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था कि ‘ग्लोबल डायनामिक अपॉर्च्युनिटी फंड’ में कथित तौर पर अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी के भाई विनोद अडाणी ने अरबों डॉलर निवेश किए हैं। इस पैसे का इस्तेमाल अडाणी ग्रुप के शेयरों के दामों में तेजी लाने के लिए किया गया था।
  • बुच 16 मार्च 2022 तक एगोरा पार्टनर्स सिंगापुर की 100% शेयरधारक बनी रहीं और सेबी के मेंबर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वह इसकी मालिक रहीं। सेबी चेयरपर्सन के रूप में नियुक्ति के 2 हफ्ते बाद उन्होंने अपने शेयर अपने पति के नाम ट्रांसफर किए।
  • SEBI चीफ पर कांग्रेस पार्टी ने भी आरोप लगाए थे। कॉग्रेस ने SEBI से जुड़े होने के दौरान ICICI बैंक समेत 3 जगहों से सैलरी लेने का आरोप लगाया था।
  • कॉग्रेस स्पोक्सपर्सन खेड़ा ने कहा था, ‘माधबी पुरी बुच 5 अप्रैल, 2017 से 4 अक्टूबर, 2021 तक SEBI में पूर्णकालिक सदस्य थीं। फिर 2 मार्च, 2022 को माधबी पुरी बुच SEBI की चेयरपर्सन बनीं। SEBI की चेयरपर्सन को नियुक्त करने वाली कैबिनेट में PM मोदी और अमित शाह शामिल हैं।’
  • हालांकि, सेबी चीफ और ICICI बैंक दोनों ने आरोपों को नकार दिया। बैंक ने कहा, ‘बैंक से रिटायर होने के बाद माधवी को कोई सैलरी या एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन नहीं दिया गया। उन्होंने सिर्फ रिटायरमेंट बेनिफिट्स लिए।

माधबी 28 फरवरी को सेबी चीफ के पद से रिटायर हुई थीं

माधबी बुचमाधबी पुरी बुच 28 फरवरी को सेबी चीफ के पद से रिटायर हुई हैं। उनकी जगह केंद्र सरकार ने वित्त सचिव तुहिन कांत पांडे को अगला SEBI प्रमुख नियुक्त किया है। तुहिन अगले 3 साल के लिए इस पद पर रहेंगे।

तुहिन कांत पांडे ओडिशा कैडर के 1987 बैच के IAS अधिकारी हैं। वे मोदी 3.0 सरकार में भारत के सबसे व्यस्त सचिवों में से एक हैं। वे फिलहाल केंद्र सरकार में चार महत्वपूर्ण विभागों को संभाल रहे हैं। उन्हें 7 सितंबर 2024 को वित्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था।

अब माधबी बुच के बारे में जानिए

बुच ने अपना करियर 1989 में ICICI बैंक से शुरू किया था। 2007 से 2009 तक ICICI बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्ट थीं। वे फरवरी 2009 से मई 2011 तक ICICI सिक्योरिटीज की मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO थीं।

2011 में सिंगापुर चली गईं और वहां उन्होंने ग्रेटर पैसिफिक कैपिटल में काम किया। माधबी के पास फाइनेंशियल सेक्टर में 30 सालों का लंबा अनुभव है और वे सेबी की तमाम कमेटियों में पहले भी रह चुकी हैं। वे अभी इसकी एडवाइजरी कमेटी में भी थीं।

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हिंडनबर्ग की नई रिपोर्ट, सेबी चीफ पर आरोप: माधबी पुरी बुच की अडाणी ग्रुप से जुड़ी ऑफशोर एंटिटीज में थी हिस्सेदारी

अडाणी ग्रुप पर अपनी रिपोर्ट के लिए जानी जाने वाली फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Sebi) की चीफ माधबी पुरी बुच पर आरोप लगाए हैं। अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किया है कि सेबी चीफ के पास अडाणी ग्रुप के जरिए पैसों की हेराफेरी स्कैंडल में इस्तेमाल की गई अस्पष्ट ऑफशोर एंटिटीज में हिस्सेदारी थी।

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हिंडनबर्ग का SEBI चीफ पर आरोप: माधबी बुच की उसी विदेशी फंड में हिस्सेदारी, जिसमें अडाणी का निवेश; बुच बोलीं- हमारी जिंदगी खुली किताब

अमेरिकी कंपनी हिंडनबर्ग ने शनिवार को सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की चेयरपर्सन पर गंभीर आरोप लगाए। हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की अडाणी ग्रुप से जुड़ी ऑफशोर कंपनी में हिस्सेदारी है।

बुच ने इन आरोपों को “निराधार” और “चरित्र हनन” का प्रयास बताया है। SEBI चेयरपर्सन ने सभी फाइनेंशियल रिकॉर्ड डिक्लेयर करने की इच्छा व्यक्त की। अपने पति धवल बुच के साथ एक जॉइंट स्टेटमेंट में उन्होंने कहा, ‘हमारा जीवन और फाइनेंसेस एक खुली किताब है।’

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