हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन गोपीचंद हिंदुजा का निधन:  पाकिस्तान से शुरू हुआ कारोबार, ईरान होते हुए लंदन पहुंचा; बने ब्रिटेन के सबसे अमीर कारोबारी
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हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन गोपीचंद हिंदुजा का निधन: पाकिस्तान से शुरू हुआ कारोबार, ईरान होते हुए लंदन पहुंचा; बने ब्रिटेन के सबसे अमीर कारोबारी

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लंदन1 दिन पहले

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गोपीचंद हिंदुजा: 29 फरवरी 1940 - 4 नवंबर 2025 - Dainik Bhaskar

गोपीचंद हिंदुजा: 29 फरवरी 1940 – 4 नवंबर 2025

हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन गोपीचंद पी हिंदुजा का 85 साल की उम्र में लंदन में निधन हो गया। हिंदुजा कई हफ्तों से बीमार चल रहे थे और हॉस्पिटल में एडमिट थे।

2023 में बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा के निधन के बाद उन्होंने ग्रुप की कमान संभाली थी। गोपीचंद को बिजनेस सर्कल में ‘जीपी’ कहकर पुकारा जाता था।

सिंधी व्यापारी परिवार से ब्रिटेन के सबसे अमीर शख्स तक की यात्रा को जानते हैं…

सिंध की मिट्टी में जन्म

साल 1940 का वो दौर, जब सिंध (अब पाकिस्तान का हिस्सा) में एक सिंधी व्यापारी परिवार में गोपीचंद हिंदुजा का जन्म हुआ। पिता मुंबई आ गए इसलिए उनका इसी शहर की गलियों में बचपन बीता। यहां उन्होंने जय हिंद कॉलेज से 1959 में ग्रेजुएशन किया। बाद में उन्हें वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी और रिचमंड कॉलेज से ऑनरेरी डॉक्टरेट की उपाधि मिली।

फैमिली बिजनेस में एंट्री

गोपीचंद हिंदुजा ने 1959 में मुंबई में फैमिली बिजनेस जॉइन किया। उन्होंने हिंदुजा ग्रुप को एक इंडो-मिडिल ईस्ट ट्रेडिंग कंपनी से बदलकर बैंकिंग, फाइनेंस, एनर्जी, ऑटोमोटिव जैसे सेक्टर्स में फैले ग्लोबल इंडस्ट्रियल पावरहाउस में तब्दील कर दिया। उनकी लीडरशिप में ग्रुप ने 1984 में गल्फ ऑयल और तीन साल बाद अशोक लेलैंड का अधिग्रहण किया।

बेटे की शादी में जेनिफर लोपेज ने परफॉर्म किया

गोपीचंद दो बेटे संजय और धीरज और बेटी रीता हैं। संजय की शादी 2015 में उदयपुर में हुई थी। बताया जाता है इसमें 15 मिलियन यूरो (करीब ₹154 करोड़) खर्च हुए थे। इस इवेंट में जेनिफर लोपेज और निकोल शेरजिंगर ने परफॉर्म किया था।

पाकिस्तान से शुरू हुआ बिजनेस, अब लंदन में हेडक्वार्टर

गोपीचंद हिंदुजा के पिता परमानंद दीपचंद हिंदुजा ने इस ग्रुप की स्थापना की थी। उन्होंने 1919 में ईरान जाने से पहले भारत के सिंध क्षेत्र में व्यापार करना शुरू किया था, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। 1971 में उनकी मृत्यु पर, उनके चार बेटों ने कारोबार का जॉइंट कंट्रोल ले लिया और 1979 में ईरान के इस्लामिक टेकओवर के बाद ऑपरेशन को लंदन ले गए।

आज, हिंदुजा ग्रुप की 38 देशों में डायरेक्ट मौजूदगी है और गतिविधियां 100 देशों तक फैली हुई हैं। ये करीब 2 लाख लोगों को जॉब्स देता है। ये बिजनेस फाइनेंस, ऑटोमोटिव, एनर्जी, मीडिया व टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में फैला है। इनकी प्रमुख कंपनियों में अशोक लेलैंड, गल्फ ऑयल, इंडसइंड बैंक, हिंदुजा टीएमटी, इंडसइंड मीडिया एंड कम्युनिकेशंस लिमिटेड हैं।

फैमिली का रियल एस्टेट पोर्टफोलियो भी इम्प्रेसिव है। उनकी सबसे पॉपुलर प्रॉपर्टी, व्हाइटहॉल की हिस्टोरिक ओल्ड वॉर ऑफिस बिल्डिंग है। इसे अब रैफल्स लंदन होटल में तब्दील कर दिया गया है। वो कार्लटन हाउस टेरेस भी ओन करते हैं, जो बकिंघम पैलेस के पास है।

सेंट्रल लंदन में बकिंघम पैलेस के पास कार्लटन हाउस टेरेस को हिंदुजा ब्रदर्स ने 2006 में खरीदा था। ये 25-बेडरूम वाला एक मेंशन है।

सेंट्रल लंदन में बकिंघम पैलेस के पास कार्लटन हाउस टेरेस को हिंदुजा ब्रदर्स ने 2006 में खरीदा था। ये 25-बेडरूम वाला एक मेंशन है।

ब्रिटेन की सबसे अमीर फैमिली है हिंदुजा

गोपीचंद लंदन बेस्ड थे, जबकि उनके छोटे भाई प्रकाश मोनाको में रहते हैं, और सबसे छोटे भाई अशोक मुंबई से इंडिया ऑपरेशन्स मैनेज करते हैं। ब्रिटने के संडे टाइम्स रिच लिस्ट 2025 के अनुसार, हिंदुजा परिवार की कुल संपत्ति करीब 37 अरब पाउंड (लगभग 4.2 लाख करोड़ रुपए) आंकी गई थी। ब्रिटेन में हिंदुजा की पहचान सबसे अमीर परिवार के रूप में है।

बोफोर्स घोटाले से भी जुड़ा था नाम

श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाश हिंदुजा का नाम बोफोर्स घोटाले में भी सामने आया था। इस घोटाले में स्वीडिश कंपनी बोफोर्स पर यह आरोप लगाया गया कि उसने 1986 में भारत सरकार को 1.3 अरब डॉलर की रिश्वत दी थी। इसमें तीनों भाइयों ने मदद की थी।

तीनों भाइयों पर CBI ने अक्टूबर 2000 में ये आरोप लगाए थे, मगर साल 2005 में दिल्ली की कोर्ट ने सबूत के अभाव में उन पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया।

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