- Hindi News
- Jeevan mantra
- Dharm
- Learn Four Secrets Of Success From The Four Events Of The Sunderkand, Ramcharitmanas In Hindi, Hanuman Crossed The Ocean And Met Goddess Sita, Life Management Tips Of Sunderkand
7 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

2 अक्टूबर को दशहरा (आश्विन शुक्ल दशमी यानी विजयादशमी) है। त्रेतायुग में श्रीराम ने इसी तिथि पर रावण का वध किया था। रामायण के सुंदरकांड में हनुमान की विजयगाथा बताई गई है, कैसे उन्होंने समुद्र पार किया, कैसे उन्होंने देवी सीता से भेंट की और लंका दहन करके श्रीराम के पास लौट आए। यहां जानिए सुंदरकांड की 4 घटनाएं और उनका लाइफ मैनेजमेंट…
हनुमान जी का समुद्र पार करना
हनुमान जी को समुद्र पार करके लंका पहुंचना था, लेकिन ये यात्रा बिल्कुल भी आसान नहीं थी। इस यात्रा के बीच में हनुमान जी ने सिंहिका और सुरसा नाम की राक्षसियों को पराजित किया था। उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा और बिना भय के आगे बढ़ते रहें।
हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएं क्यों न आएं, लक्ष्य के प्रति विश्वास और धैर्य बनाए रखना चाहिए। बिना भय के कार्य करने से सफलता मिलती है।
देवी सीता और हनुमान की भेंट
लंका पहुंचने के बाद हनुमान जी ने देवी सीता को खोजने की बहुत कोशिश की, लेकिन पहले प्रयास में वे असफल हो गए, कहीं भी उन्हें देवी सीता दिखाई नहीं दीं। इसके बाद उन्होंने फिर से राम का स्मरण करके सीता को खोजना शुरू किया, दूसरे प्रयास में हनुमान जी सफलता मिली और अशोक वाटिका में देवी सीता से भेंट हुई।
ये घटना सिखाती है कि किसी काम में पहले प्रयास में असफलता मिलती है तो हमें निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए और सकारात्मक सोच के साथ फिर से कोशिश करनी चाहिए, तभी सफलता मिलती है।
मेघनाद ने बंदी बनाया हनुमान जी को
मेघनाद ने हनुमान जी को बंदी बनाने के लिए ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया था। ब्रह्मास्त्र के सम्मान में हनुमान जी ने बंधन स्वीकार कर लिया। इसके बाद मेघनाद हनुमान को लेकर लंका दरबार में पहुंचा। यहां रावण ने हनुमान की पूंछ में आगे लगाने का आदेश दे दिया, इसके बाद हनुमान जी ने अपनी जलती पूंछ से पूरी लंका में आग लगा दी।
इस घटना में हनुमान जी ने संदेश दिया है कि हमें मुश्किल समय में भी अपने आराध्य, मार्गदर्शक का मान रखना चाहिए। हनुमान जी ब्रह्मास्त्र का यानी ब्रह्मा जी मान रखते हुए बंधन स्वीकार किया था। बाद में श्रीराम की कृपा से हनुमान जी ने लंका में आग लगा दी।
हनुमान जी ने पहले सीता को और फिर राम को संदेश पहुंचाया
लंका में हनुमान जी देवी सीता से भेंट करके उन्हें श्रीराम का संदेश दिया कि वे उन्हें लेने जरूर आएंगे। लंका से लौट कर श्रीराम को सीता का संदेश दिया कि वे आपकी प्रतीक्षा कर रही हैं।
हनुमान जी ने यहां सीख दी है कि हमें रिश्तों में सकारात्मक संपर्क बनाए रखना चाहिए। रिश्तों में विश्वास और उम्मीद को बढ़ावा देना चाहिए, तभी रिश्तों में प्रेम बना रहता है।








