9 महीने में सोना 49% और चांदी 60% चढ़ी:  सोना ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है, जानें सोने में तेजी के 5 कारण
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9 महीने में सोना 49% और चांदी 60% चढ़ी: सोना ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है, जानें सोने में तेजी के 5 कारण

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नई दिल्ली16 घंटे पहले

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सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर चल रही हैं। प्रमुख वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि सोने की कीमतों में लगभग 50% की भारी बढ़ोतरी हो सकती है। बैंक का मानना है कि दुनिया भर में जारी जिओ पॉलिटिकल टेंशन और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण सोना रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू सकता है।

गोल्डमैन सैक्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने अगले साल तक सोने के लिए 5000 डॉलर प्रति औंस का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। मौजूदा एक्सचेंज रेट के हिसाब से भारतीय मुद्रा में यह लगभग 1,55,000 रुपए प्रति 10 ग्राम होगा। यह सोने की मौजूदा बाजार कीमत से काफी ज्यादा है।

1.44 लाख रुपए तक जा सकता है सोना ब्रोकरेज फर्म पीएल कैपिटल के डायरेक्टर संदीप रायचुरा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मौजूदा लगभग 1,14,000 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,44,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। 23 सितंबर 2025 को अमेरिकी स्पॉट गोल्ड 1,13,800 रुपए 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो दो साल पहले से लगभग दोगुना है।

सोने के भाव में लगातार छठे हफ्ते तेजी बनी हुई है। रूस समेत कई देशों के बीच तनाव, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तीखी बयानबाजी और फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें और घटाए जाने की उम्मीद ने इस रुझान को तेज किया है।

इस साल अब तक सोने ने 49% और चांदी ने 60% रिटर्न दिया घरेलू बाजार में शुक्रवार को 24 कैरेट सोना 1,13,261 रुपए प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,03,748 रुपए प्रति10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी भी 1,060 रुपए महंगी होकर 1,38,100 रुपए प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई।

इस साल अब तक सोने ने 49% और चांदी ने 60% रिटर्न दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की कविता चाको के अनुसार, शुरुआती सितंबर में कीमतें 6.7% बढ़ गईं, क्योंकि निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना खरीदा।

5 बड़े कारण, जिससे सोने में तेजी के आसार दिख रहे हैं…

1. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के बड़े बैंक डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। इसलिए वे अपने खजाने में सोने का हिस्सा लगातार बढ़ाते जा रहे हैं।

असर: जब बड़े बैंक लगातार खरीदते हैं तो बाजार में सोने की मांग बनी रहती है और कीमत ऊपर जाती है।

2. ‘ट्रम्प फैक्टर’ और नीति-अनिश्चितता: अमेरिका की नीतियों को लेकर अनिश्चितता है। फेडरल रिजर्व पर दखल की बातें डॉलर-बांड बाजार को कमजोर करती हैं।

असर: निवेशक सुरक्षित ठिकाना ढूंढ़ते हैं और सोने की ओर भागते हैं। इससे सोना की कीमतें बढ़ने लगती हैं।

3. क्रिप्टो से सोने की ओर रुख: क्रिप्टो में उतार-चढ़ाव और सख्त नियमों के डर से निवेशक पैसा सोने में लगा रहे हैं। पिछले कुछ समय के दौरान भारत में शेयर बाजार से कम रिटर्न ने भी सोने को आकर्षक बना दिया।

असर: सोने की मांग में तेजी से कीमतें चढ़ जाती हैं।

4. डीडॉलराइजेशन: कई देश डॉलर का इस्तेमाल कम करके अपने आर्थिक मॉडल बदल रहे हैं। अमेरिका पर कर्ज बढ़ रहा है और डॉलर कमजोर हो रहा है।

असर: डॉलर कमजोर होता है, तो सोने में तेजी आती है।

5. लॉन्ग-टर्म एसेट: सोना कभी भी पूरी तरह बेकार नहीं होता। यह नष्ट नहीं होता, सीमित मात्रा में है और महंगाई के समय अपनी कीमत बचा लेता है।

असर: लंबे समय में सोना रखना ज्यादातर फायदेमंद है।

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