21 मिनट पहलेलेखक: अमित कर्ण
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वेटरन एक्टर धर्मेंद्र का 89 साल की उम्र में 24 नवंबर को निधन हो गया। लीजेंड्री एक्टर के निधन को हिंदी सिनेमा के लिए बड़ी क्षति मानी जा रही है। उनके साथ कई फिल्मों मे साथ काम कर चुकीं एक्ट्रेस अनीता राज ने दैनिक भास्कर के साथ अपनी यादें शेयर की हैं। इस दौरान वो इमोशनल भी हुईं।
उन्होंने कहा- ‘यह अविश्वसनीय है। मेरे पास कोई अल्फाज नहीं हैं, जो यह बयां कर सके कि इतने बड़े कलाकार, इतने अच्छे इंसान आज हमारे बीच में नहीं हैं। यह बहुत दुख की बात है। मेरे लिए तो यह व्यक्तिगत क्षति है, क्योंकि धरम जी सिर्फ सह-कलाकार नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसे थे।’
एक न्यू कमर को मिला बेपनाह सपोर्ट
मैंने उनके साथ छह-सात फिल्में कीं। उनके साथ मेरी पहली फिल्म ‘नौकर बीवी का’ थी। उस समय मैं बिल्कुल ही नई थी।
मगर उन्होंने कभी यह नहीं दिखाया कि वह इतने सीनियर हैं और एक न्यू कमर के साथ काम कर रहे हैं। यही उनकी सबसे बड़ी चीज थी। वह इतना सपोर्ट करते थे, इतना इनकरेज करते थे।

ये फिल्म साल 1983 में रिलीज हुई थी।
वह हमेशा कहते थे
“एक बात याद रखना, एक अच्छा इंसान और एक थोड़ा मीडिओकर एक्टर जिंदगी भर चलता है, लेकिन अगर एक इंसान अच्छा नहीं हो और एक्टिंग बहुत अच्छा हो, वो बहुत कम चलता है।”
यह बात मैं हमेशा से अब तक अपने साथ लेकर चली हूं। उनका मानना था कि अगर आप एक अद्भुत इंसान हैं, तो आप इस इंडस्ट्री में बने रहेंगे। और धरम जी तो इस मामले में, भूल जाइए… वह एक अद्भुत इंसान और एक अद्भुत एक्टर थे।
परिवार से जुड़ाव
हमारा संबंध सिर्फ काम तक सीमित नहीं था। मेरे हसबैंड के अंकल, अर्जुन हिंगोरानी ने ही उन्हें इंडस्ट्री में इंट्रोड्यूस किया था। तो वह तो बिल्कुल हमारी फैमिली के जैसे थे। वह हमेशा कहते थे कि “ये हिंगोरानी जो है, वो मेरी फैमिली है।”
यह सुनकर ही मुझे बहुत अच्छा लगता था। बस अब यही प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति मिले और वह हमेशा सुखी रहें। हमारे लिए तो वह अभी तक यहीं हैं और हमेशा रहेंगे, उनकी फिल्मों में, हमारी यादों में।
एक्टिंग सीखने का नजरिया
वह किरदारों को जिस तरह से एप्रोच करते थे, वह देखने लायक होता था। ‘नौकर बीवी का’ एक कॉमेडी मूवी थी, मगर वह उस कॉमेडी में भी इमोशन्स ले आते थे। वह इमोशन से कॉमेडी में और कॉमेडी से इमोशन में इतनी सहजता से ट्रांजिशन करते थे कि सीखने लायक था।
एक बार मैंने उनसे कहा कि मैं आपसे बहुत कुछ सीखती हूं। इस पर उन्होंने हंसते हुए कहा था- “ये एक एक्टर जिंदगी भर सीखता है। एक्टिंग… जिस दिन इसमें एक एक्टर ने बोल दिया कि मैं एक्टर बन चुका, उसका डाउनफॉल आ गया।”

वह कहते थे कि एक्टिंग एक पैशन होना चाहिए और आदमी जब तक करता रहे तब तक सीखता रहे। आज भी जब हम सेट पर जाते हैं, नए एक्टर्स को देखते हैं, उनसे भी सीखते हैं। यह छोटी-छोटी बातें, जो उन्होंने मुझे तब सिखाई थीं, वह अभी जब पता चला कि वह नहीं हैं, तो बहुत याद आती हैं।
अनुशासन और फिटनेस
वह शुरू से ही फिटनेस फ्रीक थे। वह सेट पर एकदम डिसिप्लिन में रहते थे। उनका खाना-पीना बिल्कुल सही होता था। मुझे याद है, तीन-चार साल पहले मैं उनसे इंडियन आइडल के सेट पर मिली थी। उन्होंने मुझे देखते ही कहा, “तू तो वैसी की वैसी है!”
जब मैंने हंसकर कहा, “जी”, तो वह बोले, “तुम बहुत एक्सरसाइज करती हो, मैंने सुना।” मैंने कहा, “हां जी।” उन्होंने कहा, “वेरी गुड! बस ऐसे ही करते रहो, क्योंकि एक्सरसाइज से बढ़कर कोई चीज नहीं है। अपने खाने पीने का ध्यान रखो, आदमी हमेशा जवान लगेगा।” उनसे मिलकर फिर एक नई सीख मिली।
एक अच्छा इंसान
धरम जी की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह सेट पर सभी की बराबर इज्जत करते थे। हम एक्टर्स को तो इज्जत मिल जाती है, लेकिन वह वर्कर्स, लाइट मैन, और बिहाइंड दी सीन्स काम करने वालों की भी उतनी ही इज्जत करते थे।
जब आउटडोर शूटिंग होती थी, तो वह वर्कर्स के साथ बैठते थे, बातें करते थे। वह कहते थे, “इनको इज्जत पहले मिलनी चाहिए।” उनके लिए बिहाइंड दी कैमरा वाले लोग भी उतने ही इम्पोर्टेन्ट थे जितने कैमरा के आगे वाले।

हमारा जमाना बहुत अच्छा था। वैनिटी वैन नहीं होती थी तब, सब मिलकर बैठते थे, खाना खाते थे, बातें करते थे। आज सब अपनी-अपनी वैनिटी वैन में चले जाते हैं। वो अपनेपन का जो माहौल धरम जी क्रिएट करते थे, वह आज भी मेरे लिए एक अलग ही दौर है।
वह हमेशा हमारे साथ रहेंगे। बस हम सब यही प्रार्थना करते हैं कि हम उनको ऐसे ही जीवित रखें—उनकी यादों में, उनकी फिल्मों में।








