खुद को आग लगाकर कस्बा खैर पुलिस चौकी में घुसे पेशे से चालक मनोज वर्मा (52) की 2 मार्च सुबह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। इस खबर पर परिवार व लोगों में आक्रोश पनप गया। पुलिस भी सतर्क हो गई। हालांकि देर रात तक दिल्ली से शव आने का इंतजार किया जा रहा था।
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इस मामले में परिवार ने एक गैर जमानती वारंट के लिए पुलिस उत्पीड़न से तंग आकर मनोज के आत्मदाह करने का आरोप लगाया था। मोहल्ला उपाध्याय कस्बा चौकी के तीस मीटर दूरी पर रहने वाले मनोज शाम करीब चार बजे घर से बाजार में घूमने निकला। अचानक उसने एक रंग की दुकान के पास खड़े होकर बोतल से खुद पर पेट्रोल डाल लिया और पुरानी तहसील की सीढि़यों पर चढ़ते हुए खुद को आग लगाई। इसके बाद वह चौकी में घुस गया। पुलिसकर्मियों ने कंबल डालकर आग बुझाई। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए जेएन मेडिकल कॉलेज से सफदर जंग अस्पातल के लिए रेफर कर दिया गया था।
मनोज के बड़े भाई राजेंद्र वर्मा और राजीव सोनी का आरोप है कि 2006 के एससी/एसटी एक्ट के मामले में न्यायालय से जारी गैर-जमानती वारंट को लेकर पुलिस चौकी का स्टाफ उसे लगातार प्रताड़ित कर रहा था, जिससे परेशान होकर उसने यह कदम उठाया है। पुलिसकर्मियों पर मारपीट तक का आरोप लगाया है।