BRO ने आदि कैलाश मार्ग को कुटी तक खोला:  5 फीट बर्फ और -15 डिग्री तापमान में काम जारी; शीतकाल में बंद रहती है आवाजाही – Pithoragarh News
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

BRO ने आदि कैलाश मार्ग को कुटी तक खोला: 5 फीट बर्फ और -15 डिग्री तापमान में काम जारी; शीतकाल में बंद रहती है आवाजाही – Pithoragarh News

Spread the love


आदि कैलाश मार्ग पर बर्फ हटाते हुए BRO के जवान।

सीमा सड़क संगठन (BRO) ने पिथौरागढ़ की व्यास घाटी में बर्फबारी के कारण बंद हुए आदि कैलाश मार्ग को कुटी तक खोल दिया है। यह मार्ग गुंजी से आदि कैलाश (ज्योलिंगकांग) तक 36 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से कुटी तक का 20 किलोमीटर का हिस्सा अब वाहनों के लिए खुल ग

.

कुटी से आगे आदि कैलाश तक 16 किलोमीटर की सड़क से बर्फ हटाने का काम तेजी से चल रहा है। बीआरओ के अधिकारियों के अनुसार, यदि मौसम अनुकूल रहा तो एक सप्ताह के भीतर इस हिस्से को भी वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा।

ऊंचाई वाले इलाकों में 2 से 5 फीट तक बर्फ जमी हुई है और तापमान-15 डिग्री सेल्सियस तक गिर रहा है। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद, बीआरओ के जवान सड़क से बर्फ हटाने में जुटे हुए हैं।

आदि कैलाश मार्ग में 5 फीट तक बर्फ जमी है।

आदि कैलाश मार्ग में 5 फीट तक बर्फ जमी है।

BRO के सामने प्रमुख चुनौतियां…

पांच फीट तक बर्फ जमी आदि कैलाश मार्ग को खोलने में सबसे बड़ी चुनौती भारी बर्फबारी है। ऊंचाई वाले इलाकों में दो से पांच फीट तक बर्फ जमी हुई है। जिससे सड़क पर आवाजाही मुश्किल हो गई है। बर्फ हटाने के लिए भारी मशीनरी की आवश्यकता होती है, जो दुर्गम इलाके में पहुंचाना मुश्किल है।

माइनस 15 डिग्री सेल्सियस पहुंचा तापमान इस समय उच्च हिमालयी क्षेत्र का तापमान -5 डिग्री से -15 डिग्री सेल्सियस तक गिर रहा है। इतनी ठंड में काम करना मुश्किल होता है और कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। उपकरणों के जमने का भी खतरा रहता है, जिससे काम में बाधा आ सकती है।

भूस्खलन का भी खतरा आदि कैलाश क्षेत्र 14,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां पहुंचना मुश्किल है। सड़कें संकरी और घुमावदार हैं, जिससे भारी मशीनरी को चलाना मुश्किल होता है। भूस्खलन का भी खतरा बना रहता है, जिससे सड़क मार्ग बाधित हो सकता है।

शीतकाल में सुरक्षा एजेंसियों के जवान और बीआरओ के कर्मचारी ही सड़क के रखरखाव के लिए यहां मौजूद रहते हैं।

शीतकाल में सुरक्षा एजेंसियों के जवान और बीआरओ के कर्मचारी ही सड़क के रखरखाव के लिए यहां मौजूद रहते हैं।

शीतकाल में नहीं रहती लोगों की आवाजाही आदि कैलाश क्षेत्र में अत्यधिक बर्फबारी के कारण आम लोगों की आवाजाही शीतकाल में नहीं होती है। नवंबर में ही गांव के लोग निचली घाटियों में लौट आते हैं। केवल सुरक्षा एजेंसियों के जवान और बीआरओ के कर्मचारी ही सड़क के रखरखाव के लिए वहां मौजूद रहते हैं। बीआरओ का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द सड़क को यातायात के लिए खोल दिया जाए, ताकि क्षेत्र में कनेक्टिविटी बहाल हो सके।

————- कैलाश मानसरोवर का पुराना पैदल मार्ग हो रहा विलुप्त:यात्री विश्राम के लिए बनी धर्मशालाएं खंडहर; एक्सपर्ट बोले- धरोहर का हो संरक्षण

कैलाश मानसरोवर यात्रा का 400 किलोमीटर लंबा मार्ग, जिस पर कभी भक्तों के कदमों की आहट और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते थे, अब सिमटता जा रहा है। यह मार्ग कहीं सड़क निर्माण में कट गया तो कहीं जंगलों में गुम हो गया है। यात्रियों और व्यापारियों के ठहरने के लिए बनी करीब 500 धर्मशालाएं भी खंडहर में बदल रही हैं। (पढ़ें पूरी खबर)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *