Earthquake in Iran: ईरान में भूकंप के तेज झटके, परमाणु संयत्र वाले इलाके में कांपी धरती
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Earthquake in Iran: ईरान में भूकंप के तेज झटके, परमाणु संयत्र वाले इलाके में कांपी धरती

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Earthquake in Iran: ईरान के नातांज क्षेत्र में रविवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई। रॉयटर्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप से किसी के हताहत होने की कोई भी जानकारी नहीं है। हालांकि, इस भूकंप की वजह से कई घरों की खिड़कियां टूट गई हैं। अभी तक नातांज परमाणु केंद्र को कोई नुकसान पहुंचा है या नहीं इस बात की पुष्टि नहीं हुई है।

इस्फहान के क्राइसिस मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के डायरेक्टर जनरल मंसूर ग्लास शिशेफोरौश ने कहा कि भूकंप के केंद्र पर 10 रेस्क्यू टीम को भेजा गया है। उन्होंने मीडिया आउटलेट्स को बताया, ‘भूकंप ने इमारतों को हिला दिया, जिससे लोगों को सड़कों और खुले इलाकों में भागना पड़ा।’ बता दें कि नातांज ईरान का एक खास परमाणु केंद्र है। यहां पर संवेदनशील परमाणु कार्यक्रम चलाए जाते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में भूकंप आने से चिंता बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भूकंप से परमाणु स्थलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन एहतियात के तौर पर उन पर निगरानी रखी जा रही है।

ईरान का नातांज परमाणु केंद्र

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान का नातांज परमाणु केंद्र पहले भी टारगेट रहा है। जुलाई 2020 में नातांज में सेंट्रीफ्यूज असेंबली प्लांट में हुए विस्फोट से भारी नुकसान हुआ था। इसके लिए ईरानी अधिकारियों ने बाद में तोड़फोड़ को जिम्मेदार ठहराया था। पिछले साल इजरायली हवाई हमले में एस-300 एयर डिफेंस सिस्टम को इस्फ़हान के पास निशाना बनाया गया था। यह वहीं प्रांत हैं, जहां पर नातांज है। यह भूकंप ऐसे वक्त पर आया है, जब अमेरिका और इजरायल के अधिकारी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए अगले हफ्ते वाशिंगटन में हाई लेवल मीटिंग की तैयारी कर रहे हैं।

अगर ईरान-इजरायल में हुई जंग

कैसे आता है भूकंप?

वैज्ञानिकों के अनुसार धरती टैक्टोनिक प्लेट्स पर ही मौजूद है। इसके नीचे तरल पदार्थ लावा है और इस पदार्थ पर ही टैक्टोनिक प्लेट्स तैरती रहती हैं। कई बार यह प्लेट्स एक-दूसरे से टकरा भी जाती हैं। यह सब बार-बार होने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने से भी टूटने भी लगते हैं। ऐसे में नीचे से निकली हुई ऊर्जा बाहर आने का रास्ता तलाशती है और इससे ही डिस्टर्बेंस होता है और लोगों को भूकंप के झटके महसूस होने लगते हैं। अंधेरे में डूबा ईरान





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