सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक शख्स नाले से पानी लेकर गोलगप्पे में डाला रहा है। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि वायरल वीडियो को असली बताया जा रहा है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो एआई से बना है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि एक शख्स नाली का पानी गोलगप्पे में इस्तेमाल कर रहा है।
सरिता बिन्नू नाम के फेसबुक यूजर ने लिखा, ”नली के गंदे पानी से फुल्की का पानी बनाते युवक का वीडियो वायरल…क्या अब स्ट्रीट फूड भी बन गया जानलेवा? देखिए कैसे लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है।” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
हमने दावे के इस्तेमाल के लिए पहले कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें कोई भी विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली, जहां इस घटना के बारे में जिक्र किया गया हो। इसके बाद हमने वीडियो को ध्यान से देखा। इस दौरान हमेंं वीडियो मेंं कुछ विसंगतिया नजर आया। वीडियो की क्वालिटी काफी ज्यादा है। इसके साथ ही शख्स के हाथ बनावटी नजर आ रहे हैं। यहां से हमें वीडियो के एआई से बने होने का संदेह हुआ।
हमने वीडियो की पड़ताल के लिए इमेज डिटेक्टर एआई टूल का इस्तेमाल किया। इस टूल ने वायरल वीडियो को एडिडेट होने की जानकारी दी।
इसके बाद हमने AI detect video पर चेक किया। इस टूल ने वायरल वीडियो को 72 फीसदी एआई से बने होने की जानकारी दी है।
आगे की पड़ताल के लिए हमने हाइव टूल का इस्तेमाल किया। इस टूल ने वायरल वीडियो 91.1 फीसदी एआई से बने होने की जानकारी दी।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को एआई से बना पाया है।








