सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक पुल गिरते नजर आ रहा है। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो असली है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो एआई से बना है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर पुल गिरने के वीडियो को असली बताकर शेयर किया जा रहा है।
सुरेश प्रजापत नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “ विकसित हो रहे भारत का एक और बड़ा कारनामा ! यह केवल एक ब्रिज खोखला नही है।, यह हमारी उम्मीद है जो ऐसे कामों के बाद दिन प्रतिदिन खोखली होती जा रही है ! परंतु जैसे ही News चैनल खोलता हूं तो जोश में भर जाता हुं लगता है 2047 नही एक दो साल में ही हम विकसित हो जाएंगे ! पर जब ये सब देखता हूं” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें sphereofai नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर वायरल वीडियो को देखने को मिला। यह वीडियो 9 फरवरी 2026 को साझा किया गया है। यहां लिखा है कि भारत में फ्लाईओवर ढह गया। भारत में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक फ्लाईओवर ढह गया। कंक्रीट का मलबा नीचे वाहनों पर गिर पड़ा। कारें और ऑटो मलबे के नीचे दब गए, धातु और मलबे के ढेर में फंस गए। इसके साथ ही यहां एआई हैशटैग का इस्तेमाल किया गया है।
यहां से हमें एआई होने का संदेह हुआ। वीडियो के क्वालिटी काफी ज्यादा थी, जो आमतौर पर एआई से बने वीडियो में होती है। आगे की पड़ताल में हमने वीडियो को हाइव एआई टूल पर सर्च किया। इस दौरान टूल ने वायरल वीडियो को 99.5 फीसदी एआई से बनने होने की जानकारी दी है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को एआई से बना पाया है।








