Fact Check: चीन ने गाजा में हवाई मार्ग से भेजी मानवीय सहायता? पढ़ें पड़ताल में दावे का सच
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Fact Check: चीन ने गाजा में हवाई मार्ग से भेजी मानवीय सहायता? पढ़ें पड़ताल में दावे का सच

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गाजा और इस्राइल के बीच चल रहे संघर्ष और तनाव के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि बहुत सारे काले रंग के पैराशूट गाजा की धरती पर उतर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि चीन गाजा में हवाई जहाज के जरिए सहायता पहुंचा रहा है। साथ कहा जा रहा है कि सऊदी अरब, कतर, यूएई जैसे देशों ने इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बाद भी मदद नहीं भेजी है। 

एयरड्रॉप एक प्रकार का एयरलिफ्ट है, जिसमें हथियार, उपकरण, मानवीय सहायता जैसी चीजें सैन्य या नागरिक विमानों के धरती पर बिना उतरे ही पहुंचाई जाती है। भोजन और आपूर्ति को हवाई मार्ग से उन क्षेत्रों में पहुंचाना अपेक्षाकृत सरल उपाय है, जहां वाहनों का काफिला नहीं जा सकता। वास्तविकता में, हवाई मार्ग से सहायता पहुंचाना सहायता संगठनों के लिए अंतिम उपाय है। यह महंगा है, सड़क मार्ग से भेजे जाने वाले काफिलों की तुलना में अकुशल है और नागरिकों के लिए संभावित खतरा है।

क्या है दावा? 

जमीन की तरफ गिरते हुए कई पैराशूट की वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि चीन के द्वारा गाजा में हवाई सहायता प्रदान की गई है। साथ ही कई अरब देशों पर तंज भी कसा गया है। 

मारिया चौधरी (@mariachaudary98) नाम की एक एक्स यूजर ने वीडियो को शेयर कर लिखा “यह सऊदी अरब का 600 बिलियन नहीं है, यह कतर का 1.2 ट्रिलियन नहीं है, यह यूएई का 1.4 ट्रिलियन नहीं है, यह चीन है जो आज गाजा में हवाई सहायता गिरा रहा है। अरब दुनिया के लिए यह कितनी शर्म की बात है। दावे की लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

 

 

 

इस तरह के कई और दावों का लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इन दावों का आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए वीडियो के कीफ्रेम्स से पड़ताल करने पर हमें इससे मिलता-जुलता कोई वीडियो देखने को नहीं मिला। इसके बाद हमने कीवर्ड के माध्यम से इस वीडियो को सर्च करने की कोशिश की। लेकिन चीन के द्वारा गाजा पर एयर ड्रॉप से मदद करने की कोई भी मीडिया रिपोर्ट हमें नहीं मिली। लेकिन हमें अमेरिका की ओर से गाजा पर एयरड्रॉप के माध्यम से मदद पहुंचाने की कई मीडिया रिपोर्ट मिलीं। 

हमें कीवर्ड से सर्च करने पर येनी सफाक नाम की एक वेबसाइट मिली। यह एक रूढ़िवादी, इस्लामवादी तुर्किये का दैनिक समाचार पत्र है। इस वेबसाइट पर एक वीडियो मौजूद था, जिसे मार्च 2024 में पोस्ट किया गया था। यह वीडियो वायरल वीडियो के जैसे दृश्यों को ही दिखा रहा था। लेकिन इस वीडियो को किसी अलग एंगल से शूट किया गया था। वीडियो में वायरल वीडियो के जैसे ही काले रंग के पैराशूट दिखाई दे रहे थे। साथ ही हमें एक टूटी हुई मीनार भी देखने को मिली, जो वायरल वीडियो और मीडिया रिपोर्ट के वीडियो दोनों में ही मौजूद थी। 

 

 

इस मीडिया रिपोर्ट में कैप्शन लिखा गया था कि उत्तरी गाजा में गिराई गई अधिकांश सहायता समुद्र में गिर गई। मानवीय सहायता आपूर्ति को गाजा पट्टी के उत्तरी भाग में हवाई मार्ग से पहुंचाया गया, जो इस्राइली कब्जे की नाकाबंदी के अधीन है। जबकि हवाई मार्ग से भेजी गई मानवीय सहायता आपूर्ति समुद्र में गिर गई। दो फलिस्तीनियों को सीपीआर देने की भी जरूरत पड़ी जो सामान लेने के लिए समुद्र में चले गए थे। 

 

 

 

आगे हमने कीवर्ड के माध्यम से इससे जुड़ी कई और मीडिया रिपोर्ट को सर्च किया। यहां हमें बीबीसी की मीडिया रिपोर्ट देखने को मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि उत्तरी गाजा में हवाई मार्ग से गिराई गई अत्यंत आवश्यक सहायता को इकट्ठा करने की कोशिश करते समय 18 फलिस्तीनी मारे गए हैं। 

 

 

 

27 मार्च 2024 को रॉयटर्स ने भी खबर छापी थी, जिसमें सहायता प्राप्त करने के चक्कर में 12 लोगों के मरने की बात की गई थी। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि सोमवार को हवाई मार्ग से प्राप्त कागज के एक टुकड़े पर अरबी भाषा में अमेरिकी ध्वज के ऊपर लिखा था कि यह सहायता अमेरिका की ओर से है।

 

 

 

पड़ताल का नतीजा 

हमारी पड़ताल में यह साफ है कि यह सहायता चीन की तरफ से नहीं की गई है। यह वीडियो 2024 का है जिसमें अमेरिका द्वारा यह सहायता भेजे जाने की बात सामने आती है। 

 



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