सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है। तस्वीर में दिख रहा है कि कुछ लोग एक कतार में बैठे हुए हैं। साथ ही उनके सामने एक मटका और सफेद रंग का कपड़ा रखा हुआ है। ऐसा लग रहा है कि कई चिताओं को एक साथ जलाया गया है और इसके बाद लोग उनके ठंडा होने का इंतजार कर रहे हैं। इस तस्वीर को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को नक्सली बताकर उनकी हत्या कर दी गई। इनके नक्सली होने की कोई जानकारी सरकार के पास नहीं है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि 6 महीने में छत्तीसगढ़ में 600 से ज्यादा लोगों को नक्सली और माओवादी बताकर मार दिया गया।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। यह तस्वीर जिस घटना की है वह 2006 में ओडिशा में हुई थी। 2 जनवरी 2006 को, जाजपुर जिले के कलिंगा नगर में प्रस्तावित छह मिलियन टन स्टील प्लांट के निर्माण के शुरू होने के खिलाफ सैकड़ों आदिवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें तीन महिलाएं और एक 12 वर्षीय लड़के सहित 12 आदिवासी पुलिस की गोलीबारी में मारे गए थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में एक पुलिसकर्मी की भी मौत हो गई थी।
क्या है दावा
इस तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों को नक्सली बताकर उनकी हत्या कर दी गई।
एडीवी दीपक बाबू (@dbabuadvocate) नाम के एक एक्स यूजर ने इस तस्वीर को शेयर करके लिखा “यह तस्वीर छत्तीसगढ़ राज्य की है जहां पर आदिवासियों को आतंकी बताकर हत्या की जा रही है, लेकिन इनके आतंकवादी होने का कोई प्रमाण सरकार के पास नहीं है। भारत में लोकतंत्र है जहां हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए।” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक आप यहां देख सकते हैं।
इस तरह के कई और दावों का लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले पोस्ट में इस्तेमाल किए गए कीवर्ड को इंटरनेट पर सर्च करने की कोशिश की। यहां हमें आकाशवाणी समाचार की वेबसाइट पर एक रिपोर्ट देखने को मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर करीब इक्कीस दिनों तक चले माओवादी विरोधी अभियान में 16 महिला माओवादियों समेत 31 माओवादी मारे गए हैं। इस रिपोर्ट को 14 मई 2025 को प्रकाशित किया गया था। 21 अप्रैल से 11 मई तक इस अभियान को चलाया गया। सीआरपीएफ के द्वारा दिए गए इस बयान मुठभेड़ में किसी भी आदिवासी और आम नागरिक के मारे जाने की कोई खबर सामने नहीं आई थी। लेकिन सीआरपीएफ के द्वारा दिए गए इस बयान में कहीं भी वायरल हो रही तस्वीर मौजूद नहीं थी।
इसके बाद हमने फोटो को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें यह फोटो हंसराज मीना नाम के एक एक्स अकाउंट पर मिली। इस फोटो को 2022 में पोस्ट करके लिखा गया था “2 जनवरी 2006 को टाटा स्टील के नए कारखाने का ओडिशा के जाजपुर जिले के कलिंग नगर में आदिवासी विरोध कर रहे थे। आदिवासी जमीन को लेने के लिए तत्कालीन बीजेडी, बीजेपी गठबंधन सरकार ने पुलिस फायरिंग में 13 आदिवासियों की निर्मम हत्या करा दी। गठबंधन में द्रौपदी मुर्मू मंत्री भी चुप रही।” हमें और एक्स अकाउंट पर यह फोटो 2020 में भी पोस्ट मिली जिनके साथ इसी तरह का कैप्शन लिखा गया था। यहां से हमें पता चला कि यह तस्वीर बीजापुर में हालिया मुठभेड़ से जुड़ी हुई नहीं है।
इसके साथ ही हमें रिवर्स इमेज सर्च करने पर ही पक्षी मैगजीन नाम की एक वेबसाइट मिली। इस वेबसाइट पर एक रिपोर्ट 2024 में प्रकाशित की गई थी जिसमें यह फोटो मौजूद थी। इस फोटो के साथ कैप्शन में लिखा गया था “2 जनवरी 2006 को कलिंग नगर में टाटा स्टील संयंत्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस गोलीबारी में मारे गए 13 ग्रामीणों के अंतिम संस्कार का फुटेज।”
आगे हमने इस घटना को कीवर्ड के माध्यम से इंटरनेट पर सर्च करने की कोशिश की। यहां हमें एमनेस्टी इंटरनेशनल की वेबसाइट पर एक पीडीएफ मिली जिसमें इस घटना के लेकिन सार्वजनिक बयान मौजूद था। एमनेस्टी इंटरनेशनल मानवाधिकारों पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय ब्रिटेन में है। इसमें बताया गया था कि कलिंग नगर पुलिस फायरिंग का एक साल पूरा हुआ उड़ीसा को आदिवासी पीड़ितों के लिए त्वरित न्याय सुनिश्चित करना चाहिए और विस्थापन पर उनकी चिंताओं का समाधान करना चाहिए। इसमें आगे बताया गया था कि 2 जनवरी 2006 को, जाजपुर जिले के कलिंगा नगर में प्रस्तावित छह मिलियन टन क्षमता वाले स्टील प्लांट (टाटा स्टील) के निर्माण के शुरू होने के खिलाफ सैकड़ों आदिवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें तीन महिलाएं और एक 12 वर्षीय लड़का सहित 12 आदिवासी पुलिस की गोलीबारी में मारे गए। विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में एक पुलिसकर्मी की भी मौत हो गई।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि फोटो 2006 में ओडिशा के जाजपुर जिले के कलिंगा नगर में हुई घटना का है।








