Fact Check: झूठा है निमिषा प्रिया की फांसी रोकने के लिए सरकार की ओर से पैसे जुटाने की मुहिम शुरू करने का दावा
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Fact Check: झूठा है निमिषा प्रिया की फांसी रोकने के लिए सरकार की ओर से पैसे जुटाने की मुहिम शुरू करने का दावा

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यमन में मौत की सजा पाने वाली निमिषा प्रिया के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया जा रहा है। इस पोस्ट में एक पोस्टर पर निमिष प्रिया को बचाने के लिए पैसे दान करने की मांग की जा रही है। विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक इकाई ने इस दावे को खारिज कर दिया है। दरअसल सोशल मीडिया पर डॉ. के.ए. पॉल नाम के एक एक्स अकाउंट से इस पोस्टर को शेयर किया गया है। इनका पूरा नाम किलारी आनंद पॉल है।  पॉल एक ईसाई धर्म प्रचारक हैं। इनके एक्स पर 20 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। फेसबुक पर इनके मिलियन में फॉलोअर्स हैं। 

भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में मौत की सजा सुनाई गई है। केरल की इस नर्स पर जुलाई 2017 में यमन के एक नागरिक की हत्या करने का आरोप है। 38 वर्षीय भारतीय महिला को 16 जुलाई को फांसी दी जानी थी। लेकिन भारतीय अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद इसे टाल दिया गया था।  

क्या दावा किया जा रहा  

डॉ. के.ए. पॉल ने जिस पोस्टर को शेयर किया है उसमें नीमिशा प्रिया की तस्वीर लगी है, साथ ही बैंक डिटेल भी दी गई है। पोस्ट को शेयर करके लिखा गया है “निमिषा को बचाने के लिए भारत सरकार के नामित खाते में सीधे दान करें। हमें 8.3 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।  

 पड़ताल  

हमने इस दावे की पड़ताल शुरू की तभी हमें पीटीआई की एक रिपोर्ट मिली। इसमें विदेश मंत्रालय का हवाला देते हुए दावे का खंडन किया गया था। 

  आगे हमें विदेश मंत्रालय के फैक्ट चेक एक्स हैंडल पर इस दावे को खंडन मिला। विदेश मंत्रालय ने किसी भी बैंक खाते की जानकारी दान के लिए साझा नहीं की है। विदेश मंत्रालय ने लिखा “हमने सोशल मीडिया पर निमिषा प्रिया मामले में भारत सरकार द्वारा निर्दिष्ट बैंक खाते में धन जमा करने की मांग के दावे देखे हैं। यह एक फर्जी दावा है।” यहां से साफ है कि भारत सरकार ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। 

 

पड़ताल का नतीजा  

हमारी पड़ताल में यह साफ है कि निमिषा प्रिया के लिए पैसे दान करने के लिए सरकार की तरफ से किसी बैंक खाते की डिटेल को शेयर नहीं की गई है। 



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