सोशल मीडिया पर इन दिनों तीन तस्वीरेंं वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में एक जहाज पर लोग बैठे नजर आ रहे हैं। तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि दो जहाजों में भरकर रोहिंग्या सऊदी अरब की ओर निकले थे, लेकिन सऊदी अरब के जहाजों ने उन्हें अपनी जल सीमा में घुसने ही नहीं दिया।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल तस्वीर 2015 की है, जब दक्षिणी थाई द्वीप में फंसे रोहिंग्या दिखाई दिए थे।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर तीन तस्वीरें शेयर कर दावा किया जा रहा है कि दो जहाजों में भरकर रोहिंग्या सऊदी अरब की ओर निकले थे, लेकिन सऊदी अरब के जहाजों ने उन्हें अपनी जल सीमा में घुसने ही नहीं दिया।
पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ नाम के फेसबुक यूजर ने लिखा, ”मजे की बात देखिए दो जहाजों में भरकर रोहिंग्या सऊदी अरब की ओर निकले थे उन्हें उम्मीद थी कि चूंकि सऊदी अरब इस्लाम का जन्मदाता है इसलिए कम से कम इस्लाम के नाम पर सऊदी अरब उन्हें शरण दे देगा… लेकिन सऊदी अरब के जहाजों ने उन्हें अपनी जल सीमा में घुसने ही नहीं दिया , वह बेचारे 4 दिन तक बीच समुंदर में लंगर डाले खड़े रहे और मदद की अपील करते रहे कई बेचारे भूखे प्यासे रोहिंग्या बीच समुद्र में मरने लगे। फिर श्रीलंका की नेवी ने दया करके उनके जहाज पर पानी के बोतल और खाने के पैकेट गिराए लेकिन सऊदी अरब का दिल नहीं पसीजा।
कानूनन संयुक्त राष्ट्र संघ के नियम के अनुसार जिस बात की दलील ओवैसी दे रहा था कि भारत को शरणार्थियों को शरण देने का आदेश है ठीक वही नियम सऊदी अरब पर भी लागू होता है लेकिन सऊदी अरब ने एक नियम बना रखा है सऊदी अरब सिर्फ अरबी नस्ल के लोगों का देश है , सऊदी अरब अपने यहां किसी को शरण नहीं देता हालांकि उसने ईदी अमीन और कुछ समय के लिए पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति नवाज शरीफ को शरण दिया था लेकिन वह एक राजनीतिक शरण थी…. अब भी यदि इस्लाम को मानने वाले फर्जी मुसलमान (अरबियों की नजर में) इस बात को नहीं समझ पा रहे हैं तो जलालत झेलना उनके नसीब में ही लिखा है…. पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें एएफपी के वेबसाइट पर वायरल तस्वीर देखने को मिली। यह तस्वीर 14 मई 2015 को साझा की गई है। इसके साथ ही बताया गया है कि 14 मई, 2015 को अंडमान सागर में दक्षिणी थाई द्वीप कोह लिपे के पास एक नाव पर रोहिंग्या प्रवासी दिखाई दे रहे हैं। एएफपी के एक रिपोर्टर के अनुसार, दर्जनों रोहिंग्या प्रवासियों से भरी यह नाव, जिनमें कई छोटे बच्चे भी शामिल थे, 14 मई को थाई जलक्षेत्र में बहती हुई पाई गई। यात्रियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में कई लोगों की मौत हो गई है। क्षतिग्रस्त नाव के डेक पर दर्जनों कमजोर दिख रहे लोग मौजूद थे, जो कोह लिपे से कई किलोमीटर दूर बहती हुई पाई गई थी।
आगे की पड़ताल में हमें सीएनएन की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 19 मई 2015 को प्रकाशित की गई है। यहां हमें वायरल तस्वीर में से एक तस्वीर देखने को मिली। रिपोर्ट में बताया गया है कि इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया के विदेश मंत्रालयों के बीच बुधवार को बैठक हो रही है। हजारों रोहिंग्या प्रवासी अंडमान सागर में फंसे हुए हैं, जबकि क्षेत्र के अधिकारी उन्हें शरण देने से इनकार कर रहे हैं। संकट का पैमाना अभी तक अज्ञात है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन से लेकर रोहिंग्या अधिकार समूहों तक, किसी भी संगठन को यह नहीं पता कि कितनी नावें हैं। हालांकि, इन जहाजों पर फंसे प्रवासियों की संख्या हजारों में होने का अनुमान है।
इसके बाद हमें डीडब्ल्यू की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 16 मई 2015 को प्रकाशित की गई है। यहां हमें वायरल तस्वीर में से एक तस्वीर देखने को मिला। इसके साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार, प्रवासियों से भरी एक नाव को शनिवार को थाई नौसेना द्वारा समुद्र में देखा गया और फिर मलेशियाई जहाजों द्वारा रोक लिया गया। संयुक्त राष्ट्र ने अंडमान सागर के आसपास के देशों से हजारों बेबस प्रवासियों को वापस धकेलने के बजाय उन्हें बचाने का आह्वान किया है।
इसके बाद हमने आगे की पड़ताल में सर्च किया कि क्या सऊदी अरब ने रोहिंग्या से भरे जहाज को वापस भेजा है क्या? इस दौरान हमें कोई भी हालिया रिपोर्ट नहीं मिली। हालांकि हमें अल जजीरा एक रिपोर्ट मिली, जो 7 जनवरी 2019 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में लिखा है कि पड़ोसी देश म्यांमार के मूल निवासी होने के बावजूद दर्जनों रोहिंग्यां को सऊदी अरब से बांग्लादेश निर्वासित किया जा रहा है। रविवार को मिडिल ईस्ट आई वेबसाइट पर भेजे गए वीडियो फुटेज में, जेद्दाह के शुमैसी नजरबंदी केंद्र में पुरुषों को निर्वासन के लिए कतार में खड़ा देखा गया। MEE को भेजे गए वॉयस नोट्स के अनुसार, कुछ रोहिंग्याओं को बांग्लादेश में निर्वासित किए जाने का विरोध करने के बाद हथकड़ी भी पहनाई गई थी।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल तस्वीर को थाईलैंड का पाया है।








