सावन के पावन महीने देश के अलग-अलग इलाकों में कांवड़ यात्रा चल रही है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है। तस्वीर में बुर्का पहने महिलाएं कांवड़ लेकर जा रही हैं। पोस्ट को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि पहली बार मुस्लिम महिलाएं कांवड़ यात्रा में शामिल हुई हैं।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल तस्वीर को गलत पाया है। हमने वायरल तस्वीर को 10 साल पुराना पाया है। दरअसल, 2015 में मध्य प्रदेश के इंदौर में सभी धर्म के लोगों ने कांवड़ यात्रा निकली थी।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि मुस्लिम महिलाएं पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल हुई हैं।
हर्षा पटेल (@harshagujaratan) नाम की एक्स यूजर ने लिखा, “कांवड़ खबर पहली बार मुस्लिम महिलाएं कांवड़ यात्रा में शामिल हुईं। भोलेनाथ का जलाभिषेक कर दिखाया कि सनातन ही अंतिम सत्य है।“ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें अरुण परमार नाम के फेसबुक पेज पर पोस्ट मिला। यह पोस्ट 25 अगस्त 2015 को साझा की गई है। पोस्ट में बताया गया है, “इंदौर में एक अनोखी कांवड़ यात्रा निकली है। सावन के अंतिम सोमवार को मधुमिलन चौराहे से गीता भवन तक यह कावड़ निकली। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों की महिलाएं कांवड़ यात्रा में शामिल हुईं। देश के इतिहास में शायद यह पहली ऐसी कावड़ यात्रा है, जिसमें बुर्का पहनकर मुस्लिम महिलाएं कावड़ लेकर चलीं और भोले बाबा का जलाभिषेक किया। यात्रा में एक ओर जहां भजनों की स्वरलहरियों गूंजी, वहीं दूसरी ओर कव्वाली। कावड़ यात्रा ने एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।”
आगे की पड़ताल के लिए हमने कीवर्ड की मदद से सर्च किया। इस दौरान हमें हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 25 अगस्त 2015 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है, “पवित्र सावन मास में हिंदू महिला भक्तों को अपने पुरुष कांवड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना एक आम दृश्य है, लेकिन इंदौरवासियों के लिए यह एक अलग अनुभव था। सोमवार को मुस्लिम और पारसी समुदायों की सैकड़ों महिलाओं को भी कांवड़ यात्रा में भाग लेते देखा गया। पिछड़ा और अल्पसंख्यक वित्त निगम के पूर्व अध्यक्ष और मध्य प्रदेश भाजपा कार्यसमिति सदस्य सैम पवारी ने यह कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कांवड़ यात्रा में सभी वर्गों के लोगों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य दूसरों को सामाजिक समरसता का संदेश देना था।”
इसके साथ ही आगे की पड़ताल में हमें पता चला कि इस तस्वीर से जुड़ा अन्य भ्रामक दावा 2019 में भी वायरल हो चुका है। हमें द क्विंट फेक्ट चेक की यह रिपोर्ट 05 मार्च 2019 को प्रकाशित की गई है। इस रिपोर्ट में भी वायरल दावे का खंडन किया गया है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल तस्वीर को 10 साल पुराना पाया है। इस तस्वीर का मौजूदा समय से कोई संबंध नहीं है।








