High Court : अदालतें ऐसा काम न करें, जिससे न्याय प्रणाली से जनता का भरोसा कम हो
होम

High Court : अदालतें ऐसा काम न करें, जिससे न्याय प्रणाली से जनता का भरोसा कम हो

Spread the love


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब ट्रायल कोर्ट को पता था कि सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित मामले में दाखिल विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर फैसला सुना दिया है तो उसे आदेश की कॉपी का इंतजार करना चाहिए था। भले ही हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश में 30 दिन के भीतर मामले में फैसले का निर्देश दिया था। इसके पालन में एक-दो दिन की देरी हो जाती तो आसमान नहीं टूट पड़ता। ऐसी जल्दबाजी अनुचित है। अदालतों को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे आम जनता का पवित्र संस्था से विश्वास कम हो।

इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकल पीठ ने हामिद और दो अन्य की ओर से दाखिल पुनरीक्षण अर्जी पर ट्रायल कोर्ट के 17 अगस्त 2024 के समन आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही 31 मार्च 2026 तक सभी पक्षों को सुनकर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। मेरठ के मुंडाली थाना क्षेत्र में 19 मई 2020 को दो व्यक्तियों की हत्या हो गई थी।

मामले में हामिद और दो अन्य आरोपी बनाए गए थे, लेकिन पुलिस ने जांच के बाद इनके नाम चार्जशीट से हटा दिए। हालांकि, वादी पक्ष ने सीआरपीसी की धारा-319 के तहत इन तीनों को मुकदमे में शामिल करने के लिए आवेदन दिया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने 17 अगस्त 2024 को स्वीकार कर लिया था। समन आदेश जारी होने पर आरोपियों ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण अर्जी दायर कर चुनौती दी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *