Meerut Professor Seema Panwar face Strict action for objectionable question on RSS
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Meerut Professor Seema Panwar face Strict action for objectionable question on RSS

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Meerut Professor Seema Panwar: मेरठ में एक सीनियर प्रोफेसर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बारे में कथित रूप से आपत्तिजनक सवाल पूछे जाने के आरोप में सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। प्रोफेसर का नाम सीमा पंवार है और वह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) से जुडे एक कॉलेज में पढ़ाती हैं। विश्वविद्यालय की ओर से प्रोफेसर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है कि वह कभी भी एग्जामिनेशन और मूल्यांकन का काम नहीं कर पाएंगी।

यह मामला तब बड़े पैमाने पर सामने आया जब आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शनिवार को यूनिवर्सिटी परिसर में पेपर को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

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क्या है यह पूरा मामला?

यह पूरा मामला 2 अप्रैल को सेकेंड ईयर के छात्रों की पॉलिटिकल साइंस की परीक्षा के प्रश्न पत्र में आए हुए दो सवालों को लेकर हुआ। प्रश्न पत्र में दो multiple-choice questions (MCQs) सवाल आरएसएस से जुड़े थे। प्रश्न संख्या 87 में पूछा गया था कि आरएसएस के उदय की वजह क्या थी? इसमें एक विकल्प में कहा गया था कि ऐसा धार्मिक और जाति आधारित राजनीति की वजह से हुआ। वहीं, प्रश्न संख्या 97 के एक उत्तर में आरएसएस का उल्लेख जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट और नक्सलियों के साथ किया गया था।

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सीसीएसयू के रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय ने इस मुद्दे पर बैठक की है और फैसला लिया है कि प्रोफेसर को आजीवन परीक्षा और मूल्यांकन कार्य से प्रतिबंधित कर दिया जाए। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय कभी भी चुने हुए विशेषज्ञों द्वारा बनाए गए प्रश्नपत्रों की समीक्षा नहीं करता, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि अपने विषय के विशेषज्ञ होने के नाते उन्होंने निर्धारित नियमों के अनुसार ही ही प्रश्न पत्र तैयार किया है।”

प्रोफेसर ने मांगी माफी, रखा पक्ष

इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद प्रोफेसर पंवार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से लिखित में माफी मांगी और कहा कि प्रश्न पत्र में दिए गए संभावित उत्तर किताबों से लिए गए थे और सिलेबस से बाहर के नहीं थे। उन्होंने कहा, “मैं 25 साल से टीचिंग के पेशे में हूं। प्रश्न पत्र में कोई भी प्रश्न सिलेबस से बाहर का नहीं था। MCQs में सही और गलत उत्तरों के लिए विकल्प होते हैं। एम. लक्ष्मीकांत की किताब सीसीएसयू के पॉलिटिकल साइंस सिलेबस में अधिकृत है और यह आरएसएस को धार्मिक दबाव वाले समूहों में शीर्ष पर रखती है। इसलिए, यह एक विकल्प के रूप में था।”

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