पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  कोई गुरु न मिले तो हनुमान जी को अपना गुरु बनाइए
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: कोई गुरु न मिले तो हनुमान जी को अपना गुरु बनाइए

दुनियादारी के प्रति भ्रम हो तो उसका निपटारा हो भी जाता है, लेकिन जब भ्रम ईश्वर के प्रति होता है तो पूरा जीवन गड़बड़ा सकता है। काकभुशुंडिजी ने एक पंक्ति बोली- निर्गुन रूप सुलभ अति सगुन जान नहिं कोई, सुगम अगम नाना चरित सुनि मुनि मन भ्रम होई। निर्गुण रूप अत्यंत सुलभ, सहज ही समझ […]