रात की नीरवता जैसे ही भोर की पहली आभा में बदलने लगी, बरसाना की धरती पर वह मंगल घड़ी उतर आई, जिसका इंतजार ब्रजवासी और देश-दुनिया से आए श्रद्धालु कर रहे थे। जन्मबेला आते ही भानु भवन में बधाई के स्वर गूंज पड़े। सखियों के मुख से निकले मंगल पदों और ढप की थाप ने […]




