एन. रघुरामन का कॉलम:  शहरों का दिल कभी गांवों के जैसा नहीं हो सकता
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: शहरों का दिल कभी गांवों के जैसा नहीं हो सकता

“नानी, मैं स्कूल जा रहा हूं!’ मैं दरवाजे से चिल्लाकर कहता था और हर सुबह, उनकी तेज लेकिन प्यार से भरी हुई आवाज लौटकर आती थी : “कितनी बार समझाऊं? ऐसा कभी नहीं कहते हैं कि मैं जा रहा हूं, कहो कि मैं स्कूल जाकर आता हूं।’ मैं उनकी ओर देखे बिना मन ही मन […]