लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज में शुचिता और पारदर्शिता प्राथमिक शर्त है। मगर राजनीतिक नफे-नुकसान के गणित में सरकारों ने सबसे अधिक कमजोर इन्हीं संस्थाओं को किया है। शायद ही कोई संवैधानिक संस्था बची है, जो भ्रष्टाचार और कदाचार की जकड़बंदी से मुक्त हो। फिर भी जब इन संस्थाओं के […]





