भाषा एक घर है। चाहे उसे कुछ लोग कुटिया कहें या कोठी। रहने वालों के लिए वह एक शरण है, जिसमें हमारे जज्बों को, विचारों को अभिव्यक्ति का सामान मिलता है। अगर कुछ सामान उसमें न हो तो हम दूसरी भाषाओं से ले आते हैं और उनको लौटाते नहीं, अपने घर में जोड़ लेते हैं। […]
Tag: Cultural identity
Editorial: When language becomes a question of self-respect, Home Minister’s indication and our responsibility – संपादकीय: जब भाषा बन जाए आत्मसम्मान का सवाल, गृहमंत्री का संकेत और हमारी जिम्मेदारी
Editorial: When language becomes a question of self-respect, Home Minister’s indication and our responsibility – संपादकीय: जब भाषा बन जाए आत्मसम्मान का सवाल, गृहमंत्री का संकेत और हमारी जिम्मेदारी | Jansatta Source link
जनसत्ता सरोकार: मेयो से शाहबानो तक, सांप्रदायिक पहचान की राजनीति का सच; पढ़े राकेश सिन्हा के विचार
जनसत्ता सरोकार: मेयो से शाहबानो तक, सांप्रदायिक पहचान की राजनीति का सच; पढ़े राकेश सिन्हा के विचार | Jansatta Source link







