छोटे पर्दे की लोकप्रियता को बड़े पर्दे पर भुनाने की कोशिश अक्सर जोखिम भरी होती है, और यह फिल्म उसी जोखिम का असफल उदाहरण है। जो किरदार टीवी पर हल्की मुस्कान दे जाते थे, वही दो घंटे की फिल्म में थकान और ऊब पैदा करते हैं। कहानी की जगह शोर है, हास्य की जगह फूहड़ता […]





