मेरे पिता आर्मी में थे। द्वितीय विश्व युद्ध में उन्होंने शिरकत की थी। आज के पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित गांव सुखो से बंटवारे के बाद ‘दारजी’ यानी मेरे पिता अलग-अलग पोस्टिंग्स से होते हुए कानपुर पहुंचे, जहां मेरा बचपन बीता। आर्मी से होने के कारण ‘दारजी’ की नजर में सफलता के पैमाने मिलिट्री के ही […]





