2014 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जदयू को 40 में से 2 सीटें मिली थीं। जब उन्होंने इस पराजय की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला किया, उस समय मैं उनके साथ था। यह खबर फैलते ही पार्टी के नेता और विधायक उनके आवास पर पहुंच गए और […]
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डॉ. राजीव ओबेरॉय का कॉलम: कई देशों के उदाहरण हमें बताते हैं कि तरक्की के सच्चे पैमाने क्या हैं
Hindi News Opinion Dr. Rajiv Oberoi Column | True Measures Of National Progress & Growth 10 घंटे पहले कॉपी लिंक डॉ. राजीव ओबेरॉय लेखक और अर्थशास्त्री इतिहास के अनेक अनुभव और उदाहरण हमें सिखाते हैं कि तरक्की की माप महज आंकड़ों से नहीं मिल सकती। यकीनन, आर्थिक वृद्धि का आकलन जीडीपी, बुनियादी ढांचे, निर्यात तथा […]
शशि थरूर का कॉलम: आज के भारत पर एकतरफा समझ कारगर नहीं हो सकती
पिछले महीने नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक लगातार पद पर रहने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए थे। उन्होंने स्वतंत्रता-संग्राम के नायक जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ा, जिन्होंने पहले आम चुनाव के बाद 4,398 दिन पद पर कार्य किया था। हालांकि नेहरू ने उससे पहले भी पांच साल तक भारत का नेतृत्व किया […]
पवन के. वर्मा का कॉलम: परिसीमन जरूरी है, लेकिन इस पर मिल-जुलकर बात हो
सरकार संसद के अगले सत्र में नया परिसीमन विधेयक लाने की योजना बना रही है। ऐसा करने के पीछे मजबूत संवैधानिक और लोकतांत्रिक तर्क मौजूद हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं समय-समय पर चुनावी क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करती हैं, ताकि प्रतिनिधित्व व्यापक रूप से जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं के अनुरूप बना रहे। लोकतंत्र का आधार यह सिद्धांत है कि प्रत्येक […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: हे सरकार! खन्दक से निकली हो या पाताल से?
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column: Oh Government! Have You Emerged From A Trench—or From The Netherworld? 1 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर भले कुछ दिन ही रहा, लेकिन युद्ध विराम देखकर लग रहा था, कोई समाधान निकलने वाला है। तेल और गैस संकट से लगातार जूझ रही दुनिया को कुछ राहत मिल सकेगी। […]
नीरज कौशल का कॉलम: केंद्र और राज्य में एक दल की सरकार होने से क्या होता है?
Hindi News Opinion Neeraj Kaushal’s Column: What Happens When The Same Party Governs Both The Centre And The State? 6 घंटे पहले कॉपी लिंक नीरज कौशल, कोलंबिया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हाल के सालों में भाजपा ने नियमित रूप से ‘डबल इंजन सरकार’ के नारे का इस्तेमाल किया है। लेकिन कानून के जानकारों का तर्क है […]
अर्घ्य सेनगुप्ता और स्वप्निल त्रिपाठी का कॉलम: 76 साल बाद भी अंग्रेजी ही राजकाज की भाषा क्यों है?
जब संविधान सभा के सदस्य संविधान के आधिकारिक अंग्रेजी पाठ पर हस्ताक्षर कर रहे थे, तब राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सदन के समक्ष उसका एक हिंदी अनुवाद भी प्रस्तुत किया और सदस्यों से उस पर भी हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया। यह कदम संविधान सभा के भीतर उठी उस सशक्त मांग से प्रेरित था […]











