टिपण्णी

मिन्हाज मर्चेंट का कॉलम: नेताओं के नाम पर क्यों हों इमारतें या योजनाएं

भारत में हवाई अड्डों, विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, शोध संस्थानों और कल्याणकारी योजनाओं के नाम राजनेताओं के नाम पर रखने की लम्बी परम्परा रही है। हालांकि, भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू इसके सख्त विरोधी थे। 11 नवंबर, 1957 को नेहरू ने एक औपचारिक प्रेस वक्तव्य जारी कर लोगों से उनके नाम पर सार्वजनिक संस्थानों के […]