एन. रघुरामन का कॉलम:  इंजरी-फ्री लाइफ, ‘गो-गो’ नहीं ‘स्लो-गो’ या ‘नो-गो’ तरीके से आती है
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: इंजरी-फ्री लाइफ, ‘गो-गो’ नहीं ‘स्लो-गो’ या ‘नो-गो’ तरीके से आती है

इस सोमवार को सुबह 7:30 बजे मेरे एक स्कूलमेट का फोन आया। चूंकि मैं अपना कॉलम लिखने में व्यस्त था तो मैंने फोन स्पीकर पर रखकर कहा, ‘बोल।’ तभी घबराई हुई महिला की आवाज सुनकर मैंने फोन कान से लगा लिया। उनकी पत्नी बोलीं, ‘भाई साहब, क्या आप जल्दी से घर आ सकते हैं? इन्हें […]