5 घंटे पहलेलेखक: शशांक शुक्ला कॉपी लिंक मैस्क्यूलिनिटी यानी मर्दानगी को लंबे समय से ताकत और सेल्फ-डिपेंडेंसी से जोड़कर देखा जाता रहा है। समाज ने कुछ ऐसे आदर्श बना दिए हैं, जैसे ‘मर्द को दर्द नहीं होता’, ‘मर्द रोते नहीं।’ और ‘आंसू बहाना कमजोर लोगों की निशानी है’ इन बातों से पुरुषों की भावनाओं को […]





