एन. रघुरामन का कॉलम:  चीजों को फेंकने से पहले खुद से पूछें कि वे क्या कहानी संजोए हैं
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: चीजों को फेंकने से पहले खुद से पूछें कि वे क्या कहानी संजोए हैं

जुलाई 1969 में जब इंसान ने पहली बार चांद पर कदम रखा तो पूरी दुनिया ने हैरत के साथ यह पल देखा था। नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन चांद की सतह पर उतरे। लेकिन इतिहास जहां इस मूनवॉक को सेलिब्रेट करता है, वहीं बहुत कम लोग इसके बाद आए जीवन-मरण के एक संकट के बारे […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  संतुलित, मीठे और अर्थपूर्ण शब्द बोलें तो ये भी पूजा है
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: संतुलित, मीठे और अर्थपूर्ण शब्द बोलें तो ये भी पूजा है

विवेकानंद कहते थे आपके शब्द आपके व्यक्तित्व के प्रतिनिधि हैं। वैसे तो आदमी आजकल ये कला सीख गया है कि बनाकर बात कैसे करना। तो भीतर कुछ और चल रहा है और बाहर बहुत मीठे शब्द बोले जा रहे हैं। लेकिन लंबे समय ऐसा चलता नहीं है। तो अध्यात्म कहता है- जो बोलो, दिल से […]