Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Natures Repercussions On Youth & Gender Identity 40 मिनट पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता देर रात की पार्टियां अब महंगी पड़ रही हैं। इनमें नशे का खेल चल रहा है। मौज-मस्ती की आड़ में आनंद अनैतिक होता जा रहा है। नई पीढ़ी के बच्चे, जो रात […]
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रसरंग में चिंतन: क्या आपने कभी किसी पेड़ को दुलारा है?
आज की सुबह मस्ती का नशा बिखेरती चली गई। खालीपन का एक लक्षण जानने योग्य है। जब उसे अच्छे विचारों की धूप और सुगंध मिलती है, तब वह सार्थक हो उठता है। यही वह क्षण है, जब हम पेड़ों को सुन सकते हैं। जो व्यक्ति यह कहता है कि पेड़ कुछ नहीं बोलते, तो उस […]
रसरंग में चिंतन: मनुष्य के लिए मुश्किल है ऋतुओं से दूर रहना
इन दिनों मैं वसंत ऋतु में ही डूबा हुआ हूं। इसके वैभव को अनुभव कर रहा हूं। हम सबने अनुभव किया होगा कि इन दिनों प्रकृति के कण-कण से सुगंध फैल रही है। पूरे वातावरण में महक व्याप्त हो गई है। ऐसे में वसंत का एक अनोखा रूप हमारे सामने होता है, जो मन को […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: किसी की कुशलता पूछना आदत नहीं हमारा स्वभाव हो
Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta Column | Indian Culture: Asking Wellbeing Is Nature, Not Habit 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता हमारी भारतीय संस्कृति में किसी की कुशलता पूछना जीवंत कृत्य है। धीरे-धीरे इसे हमने आदत बना लिया, जबकि यह पूछताछ स्वभाव होना चाहिए। हम समाज में किसी से मिलते हैं तो […]








