पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  भीड़ बाहर की हो या भीतर की, इसे संयमित रखिए
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: भीड़ बाहर की हो या भीतर की, इसे संयमित रखिए

भीड़ बढ़ती ही जा रही है। केवल मनुष्यों ही नहीं, बेहिसाब डेटा और सूचनाओं की भी भीड़ बाढ़ की तरह हमारे जीवन में उतर गई है। और इसी कारण किसी भी बात की सच्चाई का पता नहीं लगता। भीड़ में सूचनाओं की सच्चाई कहीं खो गई। भीड़ के कारण आयोजनों के पीछे का सही उद्देश्य […]