पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अहंकार की विदाई में ही संसार के सारे सुख समाए हैं
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अहंकार की विदाई में ही संसार के सारे सुख समाए हैं

जिन विवेकानंद जी और स्वामी रामतीर्थ को सारी दुनिया में प्रशंसा मिली, उनको अपने ही देश में तवज्जो नहीं दी गई थी। और ये दोनों कहा करते थे कि प्रशंसा का प्रमाण-पत्र लेना भी हो तो परमात्मा से लो, दुनिया क्या देगी। लेकिन मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी होती है अहंकार, और प्रशंसा अहंकार का […]