भक्ति के लिए जिन गतिविधियों की आवश्यकता बताई गई, उनमें शामिल हैं नियमित रहना, निरंतरता होना, सचेत होना, एकाग्रता बनाए रखना। तुलसीदास जी ने तो हनुमान चालीसा में लिखा है- नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा। अगर आप भक्ति कर रहे हैं तो निरंतरता बनाए रखिए। और जब ये बातें भक्ति से […]





