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तारिक मलिक का कॉलम: क्या होगा जब एआई हमारी ‘इजाजत’ लेना बंद कर देगा?

एक दृश्य की कल्पना करें। कोई कंपनी अपनी टीम को एक कठिन टास्क देती है। फिर हर सदस्य को अलग-अलग कमरों में बंद कर देती है और उनसे कहती है कि समस्या का समाधान खोजें। लेकिन किसी तरह वे आपस में बात करने का रास्ता खोज लेते हैं और एक-दूसरे से अपने सुझाव साझा करने […]

सुखवीर सिंह का कॉलम:  टेक्नोलॉजी जादू की छड़ी नहीं, समाधान समाज में ही खोजने होंगे
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सुखवीर सिंह का कॉलम: टेक्नोलॉजी जादू की छड़ी नहीं, समाधान समाज में ही खोजने होंगे

आज हर समस्या के समाधान के लिए हमारे सामने कोई न कोई नई तकनीक उपस्थित है। सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हों तो कैमरे लगा दीजिए, अनियमितता हो तो डिजिटल प्लेटफॉर्म बना दीजिए, शिक्षा कमजोर हो तो ऑनलाइन ऐप्स ले आइए, शासन में कठिनाई हो तो एआई जोड़ दीजिए। ऐसा लगता है मानो तकनीक कोई जादू […]

कार्ल बेनेडिक्ट फ्रे का कॉलम:  हम केवल आमदनी के लिए ही कोई काम नहीं करते हैं
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कार्ल बेनेडिक्ट फ्रे का कॉलम: हम केवल आमदनी के लिए ही कोई काम नहीं करते हैं

Hindi News Opinion Karl Benedict Frey Column: Work Meaning Beyond Income | AI Automation Impact 8 घंटे पहले कॉपी लिंक कार्ल बेनेडिक्ट फ्रे ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टिटयूट में एआई के एसोसिएट प्रोफेसर कर्ट वोनेगट ने अपने उपन्यास ‘प्लेयर पियानो’ (1952) में एक ऐसी दुनिया की कल्पना की थी, जहां मशीनों ने अधिकांश उद्योगों को ऑटोमैट कर […]