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रीटा कोठारी का कॉलम: दु:ख को लेकर हमारी समझ भी समय के साथ बदलती गई है

कभी-कभी कोई फिल्म, फिल्म न रहकर एक देश बन जाती है, जहां हम चले जाते हैं अनजाने में, सुनते हुए, गुनगुनाते हुए। एक ऐसी ही यात्रा हो गई, जब यह गाना जेहन में बस सा गया- ‘न मिलता गम तो बर्बादी के अफसाने कहां जाते, अगर दुनिया चमन होती तो वीराने कहां जाते।’ अगर दु:ख […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  परिपक्व संगठन हमेशा पूछते हैं कि ‘क्या हो सकता है’, न कि ‘क्या हुआ’
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एन. रघुरामन का कॉलम: परिपक्व संगठन हमेशा पूछते हैं कि ‘क्या हो सकता है’, न कि ‘क्या हुआ’

जो गुड़ी पड़वा उत्सव का दिन होना था, वह इंदौर शहर के लिए शोक का दिन बन गया। बुधवार को एक घर में लगी आग में मारे गए सात लोगों की चिताएं जब एक साथ जलीं तो इसकी पीड़ा पूरे शहर को सामूहिक तौर पर महसूस हुई। मृतकों में एक मासूम भी था। इस दर्दनाक […]

उंटगन नदी हादसा: 13 लोग डूबे, पांच की लाशें मिलीं….भाजपा सांसद चाहर पर भड़के ग्रामीण, मुर्दाबाद के लगाए नारे