डेरेक ओ ब्रायन का कॉलम:  हमारा सिस्टम ही महिलाओं के पक्ष को कमजोर करता है
टिपण्णी

डेरेक ओ ब्रायन का कॉलम: हमारा सिस्टम ही महिलाओं के पक्ष को कमजोर करता है

इस महीने की शुरुआत में मणिपुर में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई एक 20 वर्षीय युवती ने दम तोड़ दिया। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में पीड़िता की बहन के ये शब्द मुझे कभी नहीं भूलेंगे- ‘कोई उसे न्याय नहीं दिला सका।’ भारत में महिलाओं के लिए न्याय के क्या मायने हैं? देखें कि कैसे हमारा […]

डेरेक ओ ब्रायन का कॉलम:  हमारा सिस्टम ही महिलाओं के पक्ष को कमजोर करता है
टिपण्णी

डेरेक ओ ब्रायन का कॉलम: हमारा सिस्टम ही महिलाओं के पक्ष को कमजोर करता है

इस महीने की शुरुआत में मणिपुर में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई एक 20 वर्षीय युवती ने दम तोड़ दिया। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में पीड़िता की बहन के ये शब्द मुझे कभी नहीं भूलेंगे- ‘कोई उसे न्याय नहीं दिला सका।’ भारत में महिलाओं के लिए न्याय के क्या मायने हैं? देखें कि कैसे हमारा […]

Somy Ali and Madhur Bhandarkar break down remembering Dharmendra | धर्मेंद्र को याद कर सोमी अली, मधुर भंडारकर रो पड़े: एक्ट्रेस बोलीं- मुझे प्यार से मुमताज बुलाते थे, मेरे पिता समान थे
मनोरंजन

Somy Ali and Madhur Bhandarkar break down remembering Dharmendra | धर्मेंद्र को याद कर सोमी अली, मधुर भंडारकर रो पड़े: एक्ट्रेस बोलीं- मुझे प्यार से मुमताज बुलाते थे, मेरे पिता समान थे

29 मिनट पहलेलेखक: वर्षा राय कॉपी लिंक भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के महान अभिनेता धर्मेंद्र जी के निधन को एक सप्ताह बीत चुके है। लेकिन उन्हें भुलाना अभी भी संभव नहीं है। हर तरफ उनकी कमी खल रही है। फिल्म जगत से लेकर लाखों प्रशंसकों तक, सभी के दिलों में उनके जाने का दर्द अभी भी […]

दुनिया मेरे आगे: पितृसत्ता के साये में स्त्री का वजूद, क्या कोख से आगे कुछ नहीं, कब टूटेंगे बेड़ियों के ये बंधन? – Dunia Mere Aage: Existence of women in the shadow of patriarchy, is there nothing beyond the womb, when will these shackles be broken?
खेलकूद क्रिकेट

दुनिया मेरे आगे: पितृसत्ता के साये में स्त्री का वजूद, क्या कोख से आगे कुछ नहीं, कब टूटेंगे बेड़ियों के ये बंधन? – Dunia Mere Aage: Existence of women in the shadow of patriarchy, is there nothing beyond the womb, when will these shackles be broken?

दुनिया मेरे आगे: पितृसत्ता के साये में स्त्री का वजूद, क्या कोख से आगे कुछ नहीं, कब टूटेंगे बेड़ियों के ये बंधन? – Dunia Mere Aage: Existence of women in the shadow of patriarchy, is there nothing beyond the womb, when will these shackles be broken? | Jansatta Source link