पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल व ईरान के बीच युद्ध के कारण खाड़ी देशों को हरी सब्जियों का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उड़ानें और समुद्री मार्ग बाधित होने से परेशान निर्यातकों ने घरेलू बाजार में ही नए अवसर तलाशने शुरू कर दिए हैं। केचअप बनाने वाली कंपनियों को टमाटर व फ्रोजन मटर का काम करने वाली कंपनियों को हरी मटर बेची जा रही है।
खाड़ी देश भारत से लौकी, हरी मिर्च, हरी मटर, परवल, भिंडी, टमाटर समेत कई सब्जियों का निर्यात करते हैं। सब्जियां पहले दुबई पहुंचाई जाती हैं, जहां से कतर, बहरीन और ओमान जैसे खाड़ी देशों में आपूर्ति होती है।
राजधानी लखनऊ निवासी अकरम बेग बताते हैं कि आम तौर पर लौकी, हरी मिर्च, परवल, भिंडी और हरी मटर फ्लाइट से भेजी जाती हैं। टमाटर का निर्यात कंटेनर से होता है। इन दिनों कारोबारी निजी कंपनियों को टमाटर और हरी मटर बेच रहे हैं। टमाटर के दाम एक रुपये प्रति किलो तक कम हुए हैं। अकरम का कहना है कि युद्ध के कारण करीब 50 फीसदी कारोबार ही बचा है।
15 दिन बाद पहुंच रहा माल
लखनऊ, बाराबंकी और आसपास के जिलों से चिकनकारी, जरदोजी और शॉल जैसे हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के निर्यात से जुड़े कारोबारी नितेश अग्रवाल बताते हैं कि 15 दिन से एयरलाइन कंपनियों के पास माल अटका है। ओमान भेजा गया शिपमेंट 13 दिन तक रास्ते में फंसा रहा।
15वें दिन खरीदार का फोन आया कि माल पहुंच गया है। दक्षिण अफ्रीका भेजा गया माल भी 15 दिन बाद तक नहीं पहुंच सका। कारोबारी भविष्य को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि एयरलाइन को माल सौंपते समय तय शर्तों के तहत देरी होने पर निर्यातक और खरीदार दोनों पर जुर्माने का जोखिम रहता है।








