देशभर में बढ़ते धार्मिक पर्यटन को देखते हुए शहर में भी इस ओर काम शुरू हो गया है। शिव मंदिरों का कॉरिडोर बनाकर सर्किट के रूप में विकसित करने की कवायद के बीच नए साल से काशी में होने वाली गंगा आरती की तर्ज पर बटेश्वर घाट पर यमुना आरती शुरू की जाएगी।
वर्तमान में पर्यटन विभाग बटेश्वर के घाट को चौड़ा कराने के साथ ही कई तरह के विकास कार्य कर रहा है। लक्ष्य रखा गया है कि दिसंबर तक इस काम को पूरा कर नए साल से इसे लोगों को शहर में नए धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में उपलब्ध कराया जाए। चूंकि इस घाट पर एक साथ शिव के कई मंदिर हैं।
ऐसे में इसे भविष्य में धार्मिक पर्यटन के सर्किट से जोड़ने की भी तैयारी चल रही है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह ने बताया कि इसके साथ ही फतेहपुर सीकरी में लाइट एंड साउड शो की प्रक्रिया को भी पूरा कर शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है। कोशिश यह है कि नए साल से आने वाले पर्यटकों को जिले में दो नए पर्यटन केंद्रों तक पहुंचाया जाए।
68 लाख सैलानी पहुंचे, पर ताज से आगे नहीं बढ़ा सफर
आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में करीब 68 लाख देसी-विदेशी सैलानी आगरा पहुंचे। इनमें से तकरीबन सभी ताजमहल देखने तो गए लेकिन वहां से आगरा किला, सिकंदरा, फतेहपुर सीकरी, एतमाद्दौला, मेहताब बाग जाने वालों की संख्या दस फीसदी से ज्यादा नहीं रही। 2023 में भी करीब 52 लाख से ज्यादा पर्यटक शहर पहुंचे पर उनका ट्रेंड भी कुछ ऐसा ही रहा। इसी ट्रेंड को बदलने के लिए अब नए सिरे से कोशिश की जा रही है।
कारोबारी बोले:
सरकार के फोकस से बदला ट्रेंड
टूरिज्म गिल्ड ऑफ आगरा के सचिव अमीरउद्दीन ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने पर ज्यादा जोर दे रही है। वाराणसी, अयोध्या के विकास और सरकार के फोकस की वजह से दुनिया भी वहां ध्यान देने लगी। शहर में भी ऐसे स्थानों को चिह्नित कर प्रमोट करने की जरूरत है।
अन्य जगहों का भी हो प्रचार
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार चौहान का कहना है कि आगरा को सिर्फ ताजमहल तक सीमित न रखा जाए। ताज को दुनिया जानती है और जानेगी। इसके साथ ही अब समय है कि अन्य कम लोकप्रिय स्थलों का प्रचार-प्रसार किया जाए। सैलानियों के शहर में रुकने की अवधि बढ़ने पर लोगों को लाभ होगा।








