कानपुर में गर्दन की नस से बैलून डालकर हृदय रोगियों का वाॅल्व फुला दिया जा रहा है। इससे रोगी सर्जरी से बच जाता है। दर्द और रक्तस्राव भी नहीं होता। रोगी की रिकवरी जल्दी हो जाती है। हृदय के वाॅल्व के इलाज में ट्रांसजुगुलर बलून मिट्रल वाल्वुलोटोमी नामक यह विधि प्रदेश में अभी एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में ही अपनाई जा रही है। जर्नल ऑफ अमेरिकन कार्डियोलॉजी ने इस विधि संबंधी शोध प्रकाशित किया है।
गर्दन की नस से ट्रांसजुगुलर बलून मिट्रल वाल्वुलोटोमी कराने में सबसे राहत उन रोगियों को है जिनकी जांघ की नसों में पतलापन और जन्मजात विकृति होती है। इसके अलावा स्पाइनल कॉर्ड के रोगियों और विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के इलाज में कोई दिक्कत नहीं होती। उनकी ट्रांसजुगुलर बलून मिट्रल वाल्वुलोटोमी प्रक्रिया सुरक्षित रहती है। ऐसे रोगियों को जांघ की नस से बैलून डालने में जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं जिससे जान का खतरा रहता है।








