एक बारगी ऐसा लगा जैसे कहीं बम फट गया हो। धमाके की आवाज सुनकर आस पास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। दो लोगों के शव सड़क पर क्षत विक्षत हालत में पड़े थे, जिनके चेहरे भी पहचाने नहीं जा रहे थे। अंदर कार में फंसे दो लोगों को भी पुलिस की मदद से लोगों ने काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, चारों अपने घर में इकलौते थे कमाने वाले
हादसे में मारे गए चारों लोगों के परिवारों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। दरअसल, चारों अपने परिवारों में कमाने वाले इकलौते थे। उनकी मौत के बाद परिजनों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
सगे भाइयों में मनीष मुजफ्फराबाद में चिकित्सक था। उसने वहां क्लीनिक खोल रखा था। उसके दो बेटे हैं। मनीष का भाई विजय शाकंभरी देवी के पास नागल माफी में मेडिकल स्टोर चलाता था। उसकी तीन बेटियां हैं। दोनों मृतकों के पिता मेम सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। विजय चार भाइयों में सबसे बड़ा था मनीष तीसरे नंबर का था। मेम सिंह दो जवान बेटों और साढू की मौत के बाद बदहवास हो गए।
हादसे की खबर के बाद लोग उनके घर सांत्वना देने पहुंचने लगे। तीसरा मृतक जितेंद्र इनका सगा मौसा था। वह बेहट के मोहल्ला माजरी में पिछले 15 साल से घर जमाई रह रहा था। वह रंगाई पुताई का काम करता था। उसकी चार बेटियां हैं। इनमें सबसे बड़ी जिया 15 साल, अनुष्का 12, सिमरन छह और सबसे छोटी इंदु चार साल की है।












