Varuthini Ekadashi Vrat Katha:वरुथिनी एकादशी की व्रत कथा, इस कथा का पाठ करने से मिलेगा पूजा का पूर्ण फल
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Varuthini Ekadashi Vrat Katha:वरुथिनी एकादशी की व्रत कथा, इस कथा का पाठ करने से मिलेगा पूजा का पूर्ण फल

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Varuthini Ekadashi 2025 Vrat Katha: हिंदू पंचांग के अनुसार, बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि तो वरुथिनी एकादशी के नाम से जानते हैं। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है। मान्यता है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से हर तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है और सुख-सौभाग्य मिलने के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगर आप भी वरुथिनी एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो पूजा करने के साथ मंत्र, चालीसा का पाठ करने के बाद अंत में इस कथा को अवश्य पड़ना चाहिए। ऐसा करने से आपको व्रत का संपूर्ण फल मिल सकता है। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी की व्रत कथा…

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा

भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को इस कथा को सुनाया था।

प्राचीन काल की बात है नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नामक राजा राज्य करते थे। वह अत्यंत दानशील तथा तपस्वी थे। एक दिन की बात है कि वह जंगल में ही ध्यान मग्न होकर तपस्या कर रहे थे, तभी अचानक से वहां पर एक जंगली भालू आ गया और तपस्या में लीन राजा का पैर चबाने लगा। लेकिन राजा बिना किसी विघ्न के अपनी तपस्या में लीन रहे। कुछ देर बाद पैर चबाते-चबाते जंगली भालू राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया।

राजा बहुत घबराया, मगर तापस धर्म अनुकूल उसने क्रोध और हिंसा न करके भगवान विष्णु से प्रार्थना की, करुण भाव से भगवान विष्णु को पुकारा। उसकी पुकार सुनकर भगवान श्रीहरि विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने चक्र से भालू को मार डाला।

राजा का पैर भालू पहले ही खा चुका था। इससे राजा बहुत ही शोकाकुल हुए। उन्हें दुःखी देखकर भगवान विष्णु बोले: हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरूथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था।

भगवान की आज्ञा मानकर राजा मान्धाता ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक वरूथिनी एकादशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से राजा शीघ्र ही पुन: सुंदर और संपूर्ण अंगों वाला हो गया। इसी एकादशी के प्रभाव से राजा मान्धाता स्वर्ग गये थे।

जो भी व्यक्ति भय से पीड़ित है उसे वरूथिनी एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए। इस व्रत को करने से समस्त पापों का नाश होकर मोक्ष मिलता है।

अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। इस दिन शुभ और मांगलिक कार्य करने के साथ सोना-चांदी सहित अन्य चीजों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इस साल इस दिन गजकेसरी , लक्ष्मी नारायण जैसे कई दुर्लभ राजयोगों का निर्माण हो रहा है। ऐसे में 12 राशियों के जीवन में किसी न किसी तरह से प्रभाव देखने को मिलने वाला है। लेकिन 12 राशियों में से इन 3 राशियों को सबसे अधिक लाभ मिलने वाला है। जानें इन लकी राशियों के बारे में

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