WB SSC Recruitment Case: शिक्षक भर्ती घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में अच्छी-खासी उथल-पुथल है। राज्य में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं और उससे पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने बड़ा मुद्दा बना लिया है। राज्य के विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफा देने की मांग की है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह अदालत का सम्मान करती हैं लेकिन इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगी।
विधानसभा चुनाव में किसी तरह के सियासी नुकसान की आशंका को देखते हुए ममता बनर्जी इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों से बात कर रही हैं और वह अदालत के फैसले से प्रभावित हुए शिक्षकों से 7 अप्रैल को मुलाकात करेंगी।
ममता ने उन्हें हरसंभव मदद की पेशकश की है। ममता बनर्जी ने कहा है कि सरकार उनके साथ खड़ी है और इस वजह से उन्हें जेल भी भेजा जा सकता है लेकिन लोग परेशान न हों।
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बंगाल में सरकार बनाना चाहती है बीजेपी
ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी साल 2011 से लगातार पश्चिम बंगाल में सरकार चला रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य में सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत लगाई थी लेकिन फिर भी पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की थी। उसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में भी टीएमसी की सीटें बढ़ी और बीजेपी की कम हुई थी।
टीएमसी के एक नेता ने कहा कि पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान हाई कोर्ट ने शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में आदेश दिया था लेकिन इसका चुनाव नतीजों पर कोई असर नहीं हुआ। उल्टा पश्चिम बंगाल में बीजेपी की लोकसभा सीटें 2019 में 18 से घटकर 12 रह गई और इस बार भी हमें ऐसा नहीं लगता कि इसका कोई असर वोटर्स पर पड़ेगा।
RG Kar अस्पताल मामला बना था गले की फांस
याद दिलाना होगा कि ममता बनर्जी की सरकार को कोलकाता के RG Kar अस्पताल में हुए बलात्कार और हत्या के मामले में लोगों के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ा था और यह भी ममता सरकार के लिए एक मुश्किल वक्त था।
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न सिर्फ बीजेपी बल्कि कांग्रेस की ओर से भी ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग की गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुवंकर सरकार कहते हैं कि ममता सरकार को एक और दिन भी सत्ता में नहीं रहना चाहिए। इसी तरह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार भी ममता बनर्जी पर हमलावर हैं। सीपीएम के पश्चिम बंगाल सचिव मोहम्मद सलीम का कहना है कि बीजेपी ने मध्य प्रदेश (व्यापम घोटाला) में जो किया वही टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में किया है।
कुल मिलाकर बात यह है कि ममता बनर्जी सरकार लोगों को यह भरोसा दिलाने की पूरी कोशिश कर रही है कि वह लोगों के साथ खड़ी है लेकिन फिर भी बीजेपी और विपक्षी दलों ने इसे जिस तरह मुद्दा बनाया है, उससे पार्टी के लिए मुश्किल जरूर खड़ी हुई है। देखना होगा कि क्या बीजेपी और विपक्षी दल अगले साल मई में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव तक इस मुद्दे के सहारे ममता बनर्जी के लिए मुसीबत खड़ी कर पाएंगे?
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