इरादों में जान और नीयत साफ हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। इसे सच कर दिखाया है 35 वर्षीय शीनू ने, जिन्होंने पत्रकारिता की कलम छोड़ पत्थरों को चुना। उन्हें तराशा और एक सफल एक्सपोर्टर के रूप में पहचान बनाई है।


इरादों में जान और नीयत साफ हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। इसे सच कर दिखाया है 35 वर्षीय शीनू ने, जिन्होंने पत्रकारिता की कलम छोड़ पत्थरों को चुना। उन्हें तराशा और एक सफल एक्सपोर्टर के रूप में पहचान बनाई है।