आज से सावन महीना शुरू:  जानिए शिव पूजन करने की वो विधि, जिस तरह श्रीराम ने शिवजी को पूजा था
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आज से सावन महीना शुरू: जानिए शिव पूजन करने की वो विधि, जिस तरह श्रीराम ने शिवजी को पूजा था

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9 घंटे पहले

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गुरुवार, 30 जुलाई से सावन महीना शुरू हो गया है। यह महीना 28 अगस्त तक रहेगा। इस बार सावन के चार सोमवार 3, 10, 17 और 24 अगस्त को होंगे। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के अमांत पंचांग में सावन की तारीखें अलग रहेंगी।

स्कंदपुराण के सेतु-माहात्म्य में श्रीराम के शिव पूजन का जिक्र है। इसमें देवी सीता ने रेत का शिवलिंग बनाया था। श्रीराम ने उसे स्थापित कर शिव-पार्वती की पूजा की और जल से अभिषेक किया था। उसी तरीके से घर और मंदिरों में शिव पूजन किया जा सकता है।

30 दिन का रहेगा सावन, 4 सोमवार और 4 मंगला गौरी व्रत होंगे

पंचांग के अनुसार इस साल सावन गुरुवार, 30 जुलाई से शुरू होकर शुक्रवार, 28 अगस्त तक रहेगा। इस तरह सावन महीना कुल 30 दिन का होगा। इस दौरान 3, 10, 17 और 24 अगस्त को चार सावन सोमवार रहेंगे। 4, 11, 18 और 25 अगस्त को मंगला गौरी व्रत होंगे। इनके अलावा कामिका एकादशी, सावन शिवरात्रि, हरियाली अमावस्या, हरियाली तीज, नाग पंचमी, पुत्रदा एकादशी और रक्षाबंधन भी इसी महीने आएंगे। सावन में दो ग्रहण रहेंगे। सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को और 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण होगा। लेकिन दोनों ही भारत में नहीं दिखेंगे।

सिर्फ शिव पूजा नहीं, सावन में शुरू होता था वेद-अध्ययन का नया सत्र

प्राचीन वैदिक परंपरा में बारिश और नई वनस्पतियों के साथ सावन में वेद-अध्ययन का नया सत्र शुरू होता था। ये बात आपस्तम्ब गृह्यसूत्र में लिखी है। त्रेतायुग के वाल्मीकि रामायण में लिखा है कि सावन महीने में श्रीराम सीता की खोज वाले अभियान को रोकते हुए सुग्रीव को कहते हैं कि ये अभियान का समय नहीं है। श्रीराम लक्ष्मण के साथ प्रस्रवण पर्वत पर ठहरकर व्रत-पूजा करते हुए वर्षा बीतने का इंतजार करते हैं।

द्वापरयुग के महाभारत काल में भीष्म, युधिष्ठिर को बताते हैं कि पूरे श्रावण में संयम रखते हुए रोज एक समय भोजन करने का नियम है। श्रावण महीने की द्वादशी तिथि पर दिन-रात उपवास करके भगवान कृष्ण के श्रीधर रूप की पूजा का भी विधान भी बताया है।

स्कंदपुराण के श्रावण माहात्म्य में शिव सनत्कुमार से कहते हैं कि बारह महीनों में श्रावण उन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है और इस महीने का कोई दिन साधना से खाली नहीं है। इसी ग्रंथ परंपरा में अगस्त्य तारे के उदय पर ऋषि अगस्त्य को अर्घ्य देने का विधान भी है। इस तरह प्राचीन परंपरा में सावन केवल शिव पूजा तक सीमित नहीं था, बल्कि विष्णु-कृष्ण उपासना और आत्मसंयम से भी जुड़ा महीना था।



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