23 मिनट पहले
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बुधवार, 29 जुलाई को आषाढ़ मास की पूर्णिमा मनाई जाएगी, जिसे गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इस पर्व को गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन माना जाता है। इस अवसर पर लोग अपने गुरु का पूजन करते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार उपहार भी भेंट करते हैं। गुरु ही हमें जीवन में सही मार्ग दिखाते हैं और ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं, इसी वजह से गुरु का स्थान सबसे ऊंचा बताया गया है। गुरु पूर्णिमा के बाद 30 जुलाई से सावन महीना शुरू हो जाएगा।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, गुरु पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर सभी तीर्थों का और नदियों का ध्यान करते हुए स्नान करना चाहिए। अगर संभव हो, तो पानी में थोड़ा सा गंगाजल भी मिला लेना चाहिए। ऐसा करने से घर पर तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिलता है। इसके बाद भगवान शिव और सूर्य देव की पूजा करें।
सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, चावल और लाल फूल डालकर ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जप करते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। माता-पिता का आशीर्वाद अवश्य लें, क्योंकि उन्हें ही पहला गुरु माना जाता है। इसके बाद अपने गुरु से मिलकर उनका पूजन करें और श्रद्धा के अनुसार शॉल, श्रीफल या अन्य उपहार भेंट करें।
- गुरु पूर्णिमा पर करें शिव जी का अभिषेक
गुरु पूर्णिमा पर भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व माना गया है। शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद बिल्व पत्र, धतूरा और आंकड़े के फूल अर्पित करें। चंदन का तिलक लगाकर धूप-दीप जलाएं, मिठाई का भोग लगाएं और आरती करें। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
जो लोग भगवान शिव, विष्णु, श्रीराम, श्रीकृष्ण, गणेश या किसी अन्य देवता को अपना गुरु मानते हैं, वे उनकी विशेष पूजा कर सकते हैं। पूजा में ॐ नमः शिवाय, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, ॐ रामदूताय नमः, कृं कृष्णाय नमः और ॐ रां रामाय नमः जैसे मंत्रों का जप किया जा सकता है। मंत्र जप के साथ ध्यान करने से मन को शांति मिलती है।
- दान-पुण्य का भी है महत्व
गुरु पूर्णिमा पर दान करना भी शुभ माना जाता है। वर्षा ऋतु में जरूरतमंद लोगों को अनाज, वस्त्र, छाता या आर्थिक सहायता देना पुण्यदायी माना गया है। इसके अलावा मंदिर में पूजा सामग्री अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान लंबे समय तक शुभ फल देता है।
- तीर्थ दर्शन और पवित्र स्नान की परंपरा
गुरु पूर्णिमा के दिन किसी प्राचीन मंदिर में दर्शन-पूजन और पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। यदि नदी तक जाना संभव न हो, तो घर में स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद घर के आसपास ही दान-पुण्य करना चाहिए। गाय को हरी घास खिलाएं। कुत्ते को रोटी खिलाएं। किसी तालाब में मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर डालें।









