नई दिल्ली3 मिनट पहले
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टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयरलाइन एअर इंडिया घरेलू उड़ानों में 22% तक कटौती कर रही है। यह बदलाव जून से अगस्त 2026 के बीच प्रभावी रहेगा।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक यह फैसला जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों के कारण लिया है। फ्यूल महंगा होने से कंपनी की ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ गई है।
वहीं, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि इंडिगो अपनी घरेलू उड़ानों में 5% से 7% की कटौती कर सकती है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब स्कूल की छुट्टियों के बाद हवाई यात्रा की मांग में सीजनल गिरावट देखने को मिलती है।
4400 वीकली फ्लाइट्स पर असर पड़ेगा
एअर इंडिया वर्तमान में हर हफ्ते करीब 4400 उड़ानें ऑपरेट कर रही है। इनमें करीब 3600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं। एअर इंडिया का कहना है कि वह बाजार की मांग और ऑपरेटिंग परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रखेगी।
जैसे ही परिस्थितियां सामान्य और स्थिर होंगी, उड़ानों की संख्या को दोबारा बहाल करने पर विचार किया जाएगा। एअर इंडिया ने 14 दिन पहले ही 23 इंटरनेशनल रूट्स पर अपनी उड़ानों की संख्या करीब 27% घटाई हैं और 6 इंटरनेशनल रूट्स पर फ्लाइट कैंसिल की हैं।
ईरान युद्ध और फ्यूल की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह
उड़ानों में कटौती की सबसे बड़ी वजह 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष है। इससे जेट फ्यूल की कीमतों में इजाफा हुआ है।
इसके अलावा, ईरानी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल न करने की वजह से अंतरराष्ट्रीय रूट लंबे हो गए हैं और पाकिस्तानी एयरस्पेस पर पाबंदियों ने भी ऑपरेशन कॉस्ट बढ़ा दी है।
एअर इंडिया ने कहा कि उड़ानों में कटौती मुख्य रूप से ऊंचे ईंधन दामों के कारण की गई है। लगातार बढ़ते फ्यूल प्राइस से एयरलाइन के ओवरऑल ऑपरेशन्स पर भारी दबाव पड़ रहा है।

एयरलाइंस का फ्यूल खर्च 40% से बढ़कर 60% हुआ
इंटरनेशनल ऑटोमोबाइल फेडरेशन (FIA) के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सेक्टर में फ्यूल की कीमतों के भारी अंतर ने एयरलाइंस के नेटवर्क को वित्तीय रूप से अस्थिर बना दिया है। पहले एयरलाइंस के कुल ऑपरेशनल खर्च में फ्यूल का हिस्सा 40% होता था, जो बढ़कर 60% तक पहुंच गया है।
मार्च-अप्रैल में भी कम रही उड़ानों की संख्या
एविएशन एनालिटिक्स फर्म ‘सिरियम’ के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च और अप्रैल में भारत की चार सबसे बड़ी एयरलाइंस के ऑपरेशन्स में पिछले साल की तुलना में 6% की गिरावट आई है।
इस दौरान इंडिगो ने 4.5% और एअर इंडिया ने 7.5% कम उड़ानें संचालित कीं। एअर इंडिया की बजट एयरलाइन ‘एयर इंडिया एक्सप्रेस’ में सबसे ज्यादा 17.1% की गिरावट दर्ज की गई।
बढ़ते किराए से यात्रियों की संख्या पर असर
ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने से एयरलाइंस ने इसका बोझ यात्रियों पर डाल दिया है, जिससे हवाई किराए महंगे हो गए हैं। किराए बढ़ने से घरेलू हवाई यात्रा की डिमांड में भी कमी आई है।
भारत में अभी इंडिगो और एअर इंडिया ग्रुप का दबदबा है और घरेलू क्षमता में इनका मार्केट शेयर करीब 90% है। इस बीच, आकासा एयर छोटे बेड़े के बावजूद तेजी से विस्तार की कोशिश कर रही है।
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एअर इंडिया ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर कटौती का फैसला लिया है। एयरलाइन ने बुधवार को बताया कि जून से अगस्त तक 6 इंटरनेशनल रूट्स की रद्द कर दी है।
इसमें दिल्ली-शिकागो और मुंबई-न्यूयॉर्क जैसे व्यस्त रूट भी शामिल हैं। इसके अलावा 23 इंटरनेशनल रूट्स पर फ्लाइट्स की संख्या घटाई है। पूरी खबर पढ़ें…
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टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया अपनी लागत घटाने के लिए कर्मचारियों की सैलरी में कटौती और उड़ानों की संख्या करीब 20% कम कर सकती है। वर्तमान में एयरलाइन हर दिन करीब 900 उड़ानों का संचालन करती है।
कंपनी मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण जेट फ्यूल महंगा होने से ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने की वजह से यह कदम उठाने की तैयारी कर रही है। बता दें कि एयरलाइन पहले से ही घाटे में है और अपने नए CEO की तलाश कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…









