एन. रघुरामन का कॉलम:  पार्टी की चर्चाओं में गर्मजोशी लानी है तो अपने पास हैरतअंगेज जानकारी रखिए
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एन. रघुरामन का कॉलम: पार्टी की चर्चाओं में गर्मजोशी लानी है तो अपने पास हैरतअंगेज जानकारी रखिए

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आपने कई ईवनिंग पार्टियों में देखा होगा कि कुछ लोग सबका ध्यान खींचते हैं। ऐसा नहीं कि वे सेलेब्रिटी या बहुत अमीर लोग हों, जो अपना फैशन दिखा रहे हों, बल्कि वे वहां इकट्‌ठे लोगों को कुछ अनसुनी कहानियां सुना रहे होते हैं और इसीलिए पार्टी की जान बन जाते हैं। दूसरों के बारे में मैं नहीं जानता, लेकिन मैं तो मेहमानों की लिस्ट और उनकी संभावित रुचि के आधार पर प्लान कर लेता हूं कि उस शाम कौन-सी कहानियां शेयर करनी हैं। सोच रहे हैं कि यह कैसे प्लान होगा? यहां छोटा-सा सुझाव पेश है। अगर आप 14-16 मार्च, 2026 के दौरान किसी सोशल इवेंट या गेट-टुगेदर में शामिल हो रहे हैं तो यकीन मानिए ‘ऑस्कर 2026’ वहां मेहमानों के बीच चर्चा का विषय रहेगा। क्योंकि उस समय पूरी मीडिया इंडस्ट्री इसी के बारे में लिख और बोल रही होगी। इसी कारण यह उन चुनिंदा दिनों में बेहद हॉट टॉपिक होगा। मुंबई में तो वर्षों से यही रुझान रहा है। तो यहां कुछ चौंका देने वाली जानकारियां हैं, जो आपकी पार्टी की चर्चा में चमक बिखेर देंगी। इसे एकेडमी अवॉर्ड के नाम से जाना जाता है। इसका समारोह 15 मार्च, 2026 को लॉस एंजेलिस में हॉलीवुड के डॉल्बी थिएटर में होगा। इसे आप 16 मार्च 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह 4.30 बजे अपने टीवी पर देख सकते हैं। थिएटर में लगभग 3,400 सीटें हैं, जो नॉमिनेटेड कलाकारों, उनके परिवारों, प्रजेंटर्स, ब्रॉडकास्ट क्रू, प्रमुख स्पॉन्सर्स और परफॉर्मर्स के लिए आरक्षित रहती हैं। ऑस्कर 2026 में इस बार ‘बेस्ट कास्टिंग’ के लिए भी एक नया अवॉर्ड दिया जाएगा, जिससे कुल कैटेगरीज अब 24 हो जाएंगी। ऑस्कर के जिन अनमोल स्टैचुएट्स को हर विजेता घर ले जाएगा, उनके भी बड़े रोचक तथ्य हैं। हर मूर्ति 13.5 इंच लंबी और 3.86-3.9 किलोग्राम वजनी होती है, यानी लगभग एक लैपटॉप के वजन के बराबर। हर विजेता को एक्सेप्टेंस स्पीच देते हुए इसे हाथ में थामना होता है। ठोस कांस्य से बनी इस ट्रॉफी पर 24 कैरेट सोने की परत होती है। मेरे जैसा सामान्य व्यक्ति सोच सकता है कि ऑस्कर ट्रॉफियां बड़े पैमाने पर बनाई जाती होंगी। लेकिन आपको हैरानी होगी कि हर स्टेच्यू को 20 कारीगरों का एक समूह हाथों से बनाता है और हर साल निर्माण की इस प्रक्रिया में छह महीने लगते हैं। हर ऑस्कर अपने आप में एक मूर्ति है, जिसमें सबसे पहले वैक्स फिगर बनाया जाता है। इसके चारों ओर कठोर और हीट रेजिस्टेंट आवरण बनाने के लिए उसे सिरेमिक स्लरी और सिलिका सैंड में डुबोया जाता है। फिर मोम को पिघलाकर उसकी जगह पिघला कांस्य भरा जाता है। ठंडा होने पर सिरेमिक खोल तोड़ते हैं और उसमें रही किसी भी कमी को ठीक करने के लिए घिसाई और पॉलिश की जाती है। मूर्ति कई चरणों से गुजरती है और सबसे कठिन हिस्सा इसके होंठ बनाना होता है, क्योंकि वे बहुत छोटे होते हैं। अंतिम चरण में उस पर सोने की परत चढ़ाई जाती है। परत चढ़ाने की प्रक्रिया इतनी हाई-टेक होती है कि एकेडमी उसी एप्नर टेक्नोलॉजी कंपनी की सेवाएं लेती है, जो नासा के उपकरणों की प्लेटिंग करती है। सोने की परत इलेक्ट्रोप्लेटिंग से चढ़ाई जाती है। मूर्ति को रासायनिक घोल में डुबोकर इलेक्ट्रिक करंट के जरिए सोने के कणों की निकल प्लेटेड कांस्य से बॉन्डिंग कराई जाती है। इससे सोना कभी उखड़ता नहीं है, हालांकि विजेताओं को आगाह किया जाता है कि इंसान के हाथों का तेल लगने से इसकी चमक कम हो सकती है। एक आखिरी बात। ऑस्कर की घोषणा से पहले अकाउंटिंग फर्म प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के केवल दो पार्टनरों को ही परिणाम की जानकारी होती है। समारोह के दौरान वे मंच के किनारों पर खड़े होते हैं, ताकि प्रजेन्टर्स को सही लिफाफे दे सकें। फंडा यह है कि अगर आप एक ऐसे स्टोरीटेलर हैं, जो अपनी कहानियों पर ज्ञान की नई परत चढ़ा सकते हैं तो मैं शर्तिया कह सकता हूं कि आप ही सब को आकर्षित करने वाली ‘क्वीन हनी-बी’ बनेंगे।



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